◾ज्योलिकोट स्थित केंद्र में सप्ताह भर का प्रशिक्षण होगा निशुल्क
◾ अस्सी फीसद अनुदान पर मिल सकेंगे मौन व बाक्स
◾उद्यान विभाग ने किया पंजीकरण का आह्वान
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))

पर्वतीय क्षेत्रों में बेमौसम बारिश, जंगली जानवरों के आंतक से खेतीबाड़ी खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है ऐसे में मौनपालन अपना ग्रामीण अपनी आर्थिकी सुधार सकते हैं। उद्यान केंद्र प्रभारी गरमपानी दीपक साह ने क्षेत्र के लोगों से मौन पालन से जुड़ स्वरोजगार की ओर बढ़ने का आह्वान किया है। प्रभारी के अनुसार इच्छुक लोग केंद्र में पंजीकरण करा योजना का लाभ उठा सकते हैं।
गांवों में खेती बाड़ी खत्म होने के कगार पर पहुंचने लगी है। कभी आपदा, बेमौसमी बारिश तो कभी जंगली जानवर व बंदर कास्तकारो की हाड़तोड़ मेहनत पर पानी फेर जा रहे है‌ जिस कारण किसानों का खेतीबाड़ी से मोहभंग होता जा रहा है। पशुपालन भी गुलदार की मार से प्रभावित हो चुका है। ऐसे में मौन पालन से जुड़ ग्रामीण बेहतर रोजगार अपना सकते हैं। योजनानुसार ग्रामीणों को पंजीकरण के बाद ज्योलिकोट स्थित मौन पालन केन्द्र में सप्ताह भर का निःशुल्क प्रशिक्षण लेना होगा। प्रशिक्षण के बाद अस्सी फीसद अनुदान पर बाक्स व मौन पालन को मौन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। लगातार मानिटरिग भी की जाएगी। उद्यान केंद्र गरमपानी के प्रभारी दीपक साह के अनुसार आर्थिक स्थिति सुधारने में मौन पालन एक बेहतर जरिया है। प्रभारी ने अधिक से अधिक लोगों से मौनपालन से जुड़ योजना का लाभ उठाने का आह्वान भी किया है।