= बजट न मिलने से बदहाल हालत में है रामगढ़ स्थित जल विद्युत परियोजना
= कभी बिजली उत्पादन के नाम पर थी पहचान अब बिजली खरीदने को मजबूर
= पचास फिसदी कटौती के साथ वेतन मिलने से कर्मचारी भी परेशान
(((भीम बिष्ट/मदन सिंह/हरीश कुमार/पंकज भट्ट की रिपोर्ट)))
रामगाढ़ क्षेत्र में स्थित रामगाढ़ जल विद्युत परियोजना विभागीय उपेक्षा का शिकार हो चुकी है। ध्यान न देने से योजना बदहाल होती जा रही है। योजना की बदहाली विभाग की लापरवाही की हकीकत बंया कर रही है। कर्मचारियों के भी वेतन में पचास फीसद कटौती कर दी गई है। जिससे कर्मचारियों की आर्थिकी की भी डगमगा चुकी है।
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर रामगाढ़ क्षेत्र में स्थित जल विद्युत परियोजना में बीते सात माह से उत्पादन ठप पड़ा है। कभी यूपीसीएल व मोबाइल टावरों समेत विभिन्न गांवों के करीब चार सौ से ज्यादा उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने वाली योजना आज खुद यूपीसीएल से बिजली खरीदने को मजबूर है। उत्पादन ठप होने से कर्मचारियों को पूरा वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। ऊर्जा समिति मद से कर्मचारियों को मूल वेतन में पचास फीसद कटौती कर वेतन दिया जा रहा है जिससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ गई है। स्थानीय लोग कई बार योजना को दुरुस्त किए जाने की मांग उठा चुके है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही जिससे लोगों में गहरा रोष भी व्याप्त है। उरेडा विभाग के अवर अभियंता एसआर गौतम के अनुसार योजना की मरम्मत को करीब 65 लाख रुपये का प्रस्ताव जिला प्रशासन के साथ ही निदेशालय को भी भेजा गया है। अभी बजट नहीं मिल सका है। फिलहाल ऊर्जा समिति के मद में शेष धनराशि से कर्मचारियों के वेतन में पचास फ़ीसदी की कटौती कर वेतन उपलब्ध कराया जा रहा है। अवर अभियंता के अनुसार बजट उपलब्ध होने के साथ ही योजना की मरम्मत का उत्पादन शुरू किया जाएगा। क्षेत्रवासियों ने योजना को दुरुस्त करने को बजट उपलब्ध कराने तथा उत्पादन शुरु किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। दो टूक कहा की लगातार उपेक्षा की जा रही है जिसे अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
