🔳 घर में इंतजार करते रहे स्वजन, आखिर में शव उठाने का लिया निर्णय
🔳 जाम से निकलकर बेटे व भतीजे ने मोक्ष धाम में किए अंतिम दर्शन
🔳 भाई के साथ मिलकर दी चिता को मुखाग्नि
🔳 हल्द्वानी से भुजान पहुंचने में लग गए चार घंटे से भी अधिक का समय
🔳 स्वजनों ने बाइपास में बेतरतीब ढंग से पार्क वाहनों को बताया जाम का बड़ा कारण
[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे व कैंची क्षेत्र में जाम का समाधान भी नहीं हो सका था की अब नवनिर्मित सैनिटोरियम – पाडली बाइपास पर भी आवाजाही करने वाले जाम का दंश झेलने को मजबूर हो चुके हैं। पिता के निधन पर दिल्ली से गांव की ओर रवाना हुए स्वजन जाम में ऐसे उलझे की घर तक नहीं पहुंच पाए। आखिर में मोक्ष धाम में उन्हें पिता के अंतिम दर्शन हो पाए।
कैंची, अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे तथा अब नवनिर्मित बाइपास पर जाम का स्थाई समाधान न होने से आवाजाही करने वाले लोगों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार परेशानी बढ़ने के बावजूद समस्या के समाधान को ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे महज ट्रैफिक प्लान लागू कर तथा रुट डायवर्ट कर इतिश्री कर दी जा रही है जिसका खामियाजा पहाड़ से हल्द्वानी तथा हल्द्वानी से पहाड़ की ओर आवाजाही करने वाले लोग भुगत रहे हैं। जाम लोगों को तमाम मुश्किलों का सामना करने को मजबूर कर दे रहा है। ताड़ीखेत ब्लॉक के खुशालकोट गांव निवासी रमेश सिंह के अनुसार बीते दिनों उनके चाचा लक्ष्मण सिंह का निधन हो जाने पर वह भाई तारा सिंह के साथ दिल्ली से चार घंटे की यात्रा कर सुबह नौ बजे के आसपास हल्द्वानी पहुंच गया पर हल्द्वानी से सैनिटोरियम – पाडली बाइपास होते हुए भुजान पहुंचने में उन्हें चार घंटे से भी अधिक का समय लग गया। बाइपास में बेतरतीब ढंग से पार्क किए गए वाहनों ने जाम में उनके वाहन को भी फंसा दिया। घंटों तक फंसने के कारण गांव में इंतजार कर रहे स्वजनों को शव को अंतेष्टि के लिए भुजान स्थित मोक्ष धाम ले जाने को कहना पड़ा। बताया की बामुश्किल जाम से निकलकर मोक्ष धाम में दिवगंत चाचा के अंतिम दर्शन हो सके। बेटे तारा सिंह ने भी भाई संदीप के साथ मिलकर पिता को मुखाग्नि दी। स्थानीय गजेंद्र सिंह नेगी समेत कई अन्य ग्रामीणों ने भी जाम के कारण खड़ी हो रही समस्याओं पर गहरी नाराजगी जताई है।
