◾जैनोली के ऐतिहासिक मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
◾झोडा़ गायन ने बांधा समां, जयकारों से गूंजायमान हुआ समूचा क्षेत्र
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))

जैनोली के ऐतिहासिक मेले में देवभूमि की समृद्ध संस्कृति एवं परंपरा जीवंत हो उठी। नगाड़े-निशानों के साथ क्षेत्र के ग्रामीणों की टोलिया सैम मंदिर पहुंची और देर सायं तक झोड़ा-चांचरी की शानदार प्रस्तुति से समां बांध दिया।
जैनोली में बैशाखी के उपलक्ष्य में चैती मेले के आयोजन की प्राचीन परंपरा है। चैती मेला पूरे उत्साह के साथ भव्य रूप से मनाया गया। परंपरानुसार फूलदेई का त्यौहार मनाने के बाद विभिन्न गांवों के ग्रामीणों की टोलियां झोड़ा गायन के साथ सैम मंदिर जैनोली में एकत्र हुई। मंदिर की परिक्रमा के बाद झोड़ा गायन की परंपरा का शानदार आगाज हुआ। ‘खोल दे माता खोल भवानी धार में किवाड़ा’ से देवी मां की स्तुति के बाद ‘फूल सग्यानका फूला त्यर फूला देवी चड़ूल’, ‘चौकोटेकि पारवती तीले धारो बोला’ जैसे विभिन्न पारंपरिक झोड़ों के गायन से ग्रामीणों ने समां बांध दिया। झोड़ों के साथ चांचरी गायन से पर्वतीय अंचल की समृद्ध लोक संस्कृति व परंपरा जीवंत हो उठी। ओड़ा भेंटने की रस्म भी निभाई गई। जैनोली, पिलखोली, शिलंगी, जोग्याड़ी, खग्यार, तस्वाड़, चमोली, उपराड़ी, डौनी, बजीना, बजोल, पन्याली, टाना, टूनाकोट, भड़गांव सहित दर्जनों गांवों से आस्था का सैलाब उमड़ा।