= प्रशासन ने आवश्यक सामग्री कराई उपलब्ध, जल्द मुआवजे का भी भरोसा
= वनाग्नि की चपेट में आकर राख हो गया आवासीय मकान
= बेतालघाट ब्लॉक के मल्लाकोट गांव की घटना

(((दलिप नेगी/मनोज पडलिया/विजय रौतेला/मदन सिंह की रिपोर्ट)))

बेतालघाट ब्लॉक के मल्लाकोट गांव में दावानल से खाक हुए आवासीय मकान का तहसीलदार कोश्या कुटोली ने मौका मुआयना किया। प्रभावित परिवार को जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराई। प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा दिलाए जाने का भी भरोसा दिलाया गया। फिलहाल परिवार के सदस्यों की पंचायत घर में रहने की व्यवस्था की गई है।
बीते मंगलवार को बेतालघाट ब्लॉक के तल्लाकोट गांव में रातीघाट बेतालघाट मोटर मार्ग से उठी आग की लपटें गांव के किसान दीवान सिंह के आवासीय मकान तक पहुंच गई। आग की लपटों ने पल भर में ही मकान व गौशाला को खाक कर डाला। दीवान सिंह व उसकी पत्नी व दो बच्चों को बमुश्किल बचाया जा सका। घर का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया। बुधवार को तहसीलदार मनीषा बिष्ट ने मय टीम गांव में पहुंचकर जायजा लिया। प्रभावित परिवार को खानपान की आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही पंचायत घर में रहने की व्यवस्था की गई। मुआवजे के लिए भी जल्द रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को उपलब्ध करा मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया गया। इस दौरान राजस्व उपनिरीक्षक निधि चौधरी, ग्राम प्रधान भावना जलाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य विनोद ढौंडियाल, भाजपा मंडल अध्यक्ष रमेश सुयाल, हरेंद्र जलाल, देवेंद्र बोहरा, वीरेंद्र बिष्ट आदि मौजूद रहे।

आग ने जलाकर राख कर दिए दीवान के सपने

प्रभावित परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य दीवान सिंह के अनुसार वह बैंकों से ऋण व अपनी जमा पूंजी लगाकर टैक्सी वाहन खरीदने के सपने देख रहा था। खेतीबाड़ी से घर की आजीविका चलती साथ ही वाहन खरीद रोजगार भी शुरू होता पर जंगल से उठी आग की लपटों ने दीवान के सपनों को राख कर दिया। आलम यह है कि अब परिवार के सदस्यों के पास पहने हुए कपड़े ही शेष बचे हैं। जिंदगी की गाड़ी अब कैसे चलेगी यह बड़ा सवाल है। वही दीवान की पत्नी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।

विभागीय कार्यशैली पर भी उठे सवाल

आग लगने के कई घंटे बाद नैनीताल से पहुंची दमकल सेवा व वन विभाग के कर्मचारियों के कार्यशैली पर भी ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य विनोद ढौंडियाल का पारा चढ़ गया। कहा कि दूरभाष पर सहायता को उपलब्ध नंबर भी काम नहीं कर रहे। बमुश्किल फोन मिला भी तो कई घंटे बाद सेवा पहुंची। उसमें भी दमकल सेवा का वाहन घटनास्थल तक नहीं पहुंच सका। ऐसे में घटनाओं पर काबू कैसे पाया जा सकेगा यह समझ से परे है।