🔳 आपदा से ध्वस्त स्टेट हाईवे पर जान हथेली पर रख आवाजाही बनी मजबूरी
🔳 क्षतिग्रस्त ढाई सौ मीटर हिस्से में सुरक्षा के इंतजार शून्य
🔳 मरम्मत के लिए बना प्रस्ताव भी फाइलों में कैद
🔳 भारतीय सेना, चार धाम के श्रद्धालु, पर्यटक व यात्री करते हैं स्टेट हाईवे से आवाजाही
[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]
पांच वर्ष पूर्व आपदा से क्षतिग्रस्त खैरना रानीखेत स्टेट हाईवे के ढाई सौ मीटर हिस्से की मरम्मत तो दूर आज तक सुरक्षित आवाजाही को ठोस प्रबंधन तक नहीं किए जा सकें है। यात्री, पर्यटक, श्रद्धालु तथा भारतीय सेना के जवान तक जान जोखिम में डाल आवाजाही को मजबूर हैं। हालत यह है कि महज कुछ मीटर शेष बचे हिस्से से खतरे के बीच यातायात सुचारु है।
खैरना रानीखेत स्टेट हाईवे से चार धाम तथा हेमकुंड साहिब के श्रद्धालुओं के साथ ही कुमाऊं रेजिमेंटल सेंटर रानीखेत के अफसर व जवान व यात्री आवाजाही करते हैं। लगभग पांच वर्ष पूर्व आपदा से स्टेट हाईवे को कालिका मोड़ के समीप भारी नुकसान पहुंचा। करीब ढाई सौ मीटर हिस्से में भारी धंसाव के चलते स्टेट हाईवे का कुछ हिस्सा ही शेष रह गया। पांच वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बावजूद आज भी हालात जस के तस है। मरम्मत तो दूर सुरक्षित आवाजाही को एक अदद सुरक्षा कार्य करने में भी जिम्मेदारों ने मुंह मोड़ लिया है। जिसका खामियाजा आवाजाही करने वालों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्रीय जन विकास संघर्ष समिति के गजेंद्र सिंह, वीरेंद्र बिष्ट, मनीष तिवारी, बिशन जंतवाल, प्रेमनाथ गोस्वामी ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है आरोप लगाया की संबंधित विभाग जनहित से खिलवाड़ पर आमादा है। महज प्रस्ताव बनाकर भेजने की बात कहकर अधिकारी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। लोगों ने मरम्मत के लिए बजट को स्वीकृति मिलने तक सुरक्षित आवाजाही को ठोस कदम उठाए जाने की मांग उठाई है। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता अजय टम्टा के अनुसार लगभग 44 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर कार्य शुरु करवाए जाएंगे।
