◾उबड़ खाबड़ पथरीली शिप्रा नदी किनारे खेलना बनी मजबूरी
◾ कई बार खेल मैदान की उठी चुकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं
◾ युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
गांवों में प्रतिभाओ की कोई कमी नहीं है। सरकार व उसके नुमाइंदे भी प्रतिभाओं को तराश उनके भविष्य को संवारने के तमाम दावे करे पर धरातल की हकीकत कुछ और ही बंया कर रही है। गांवों के नौनिहालों खेतों, सड़कों तथा नदियों किनारे खेल अपने भविष्य को संवारने की जुगत में जुटे हुए हैं। एक अदद खेल मैदान न होने से युवा निराश हैं तो वहीं उपेक्षा पर क्षेत्रवासियों ने भी गहरी नाराजगी जताई है।
खेल के क्षेत्र में युवाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। खेल मैदान के अभाव में युवा पीढ़ी खेल के क्षेत्र भविष्य कैसे बनाएगी यह बडा़ सवाल है। अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित गरमपानी खैरना क्षेत्र के युवा शिप्रा नदी किनारे रोखड़ में अस्थाई मैदान तैयार कर खेलने को मजबूर हो चुके हैं। क्षेत्र का एकमात्र खेल मैदान पहले ही पार्किंग निर्माण के नाम पर उजाड़ डाला गया है। ऐसे में अब क्षेत्र के युवा रोखड़ में खेल पसीना बहाने को मजबूर हैं। कई बार क्षेत्र में खेल मैदान निर्माण की मांग भी उठाई जा चुकी है बावजूद कोई सुधलेवा नहीं है। स्थानीय हरक सिंह पिनारी, भैरव नैनवाल, कैलाश पिनारी, धन सिंह, भुवन पिनारी, प्रताप सिंह, भूपाल सिंह आदि ने क्षेत्र में खेल मैदान का निर्माण किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है ताकी नौनिहाल लाभान्वित हो सकें।
