🔳 समस्याओं से घिरे ग्रामीण प्रत्याशियों को गिना रहे समस्या
🔳 चुनाव में ही गांव में दिखने की बात कहकर कर रहे गहरी चोट
🔳 पेयजल, सड़क, सिंचाई, जंगली जानवर, स्वास्थ्य शिक्षा का उठा रहे मुद्दा
🔳 गांवों में समस्याओं का अंबार, ग्रामीणों को है समाधान का इंतजार
[[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]
पंचायत चुनाव के बहाने ही सही पर ग्रामीणों के मन का गुबार समस्या बनकर सामने आ रहा है। पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रास्ते, सिंचाई समेत तमाम समस्याओं के समाधान का इंतजार करते करते ग्रामीण थक चुके हैं पर वह घड़ी सामने नहीं आ रही जब गांवों में व्याप्त समस्याओं का समाधान हो सके। वोट के लिए गांव पहुंच रहे प्रत्याशियों को भी मतदाता पांच साल में एक बार गांव में दिखने की बात कहकर खूब खरी खोटी सुना रहे हैं।
पंचायत चुनाव की मतदान की तारिख नजदीक आने के साथ ही प्रत्याशियों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। गांवों में भी प्रत्याशियों का मेला लगा हुआ है। कभी कोई तो कभी कोई प्रत्याशी दावों की लंबी फेहरिस्त लेकर गांव पहुंच रहे हैं। गांवों में पहले ही समस्याओं से घिरे ग्रामीण परेशान हैं। बड़े बड़े दावे उनके जख्मों में नमक छिड़क दिया जा रहा है। गांवों के पैदल रास्तों की बदहाली, पेयजल योजनाओं से पानी न मिलने, सिंचाई योजनाओं के खस्ताहाल पड़े होने, जंगली जानवरों के लगातार खेती चौपट कर देने समेत तमाम समस्याएं आज भी जस की तस है। परेशान ग्रामण प्रत्याशियों को खरी खोटी सुनाने में भी पीछे नहीं हट रहे। महज चुनावों के समय गांवों में पहुंचने की बात कहकर प्रत्याशियों व समर्थकों की दुखती रग पर हाथ भी रख दें रहे हैं। सूदूर गांवों के ग्रामीण स्कूलों के एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे स्कूलों पर सवाल पूछ प्रत्याशियों की कड़ी परीक्षा भी ले रहे हैं। समस्याओं के अंबार से गिरे गांवों के लोग प्रत्याशियों से हार जीत के बाद भी समाधान को साथ रहने की अपील भी करने से नहीं चूक रहे। बहरहाल पंचायत के त्यौहार में गांवों में व्याप्त समस्याओं को सामने आने का मौका मिल गया है अब देखना रोचक होगा की कौन सा प्रत्याशी ग्रामीणों के दिल में जगह बनाता है और फिर समस्याओं के समाधान को ग्रामीणों के साथ खड़े होकर संघर्ष करता है।
