🔳 हाथों में डंडे लेकर वन विभाग के खिलाफ की नारेबाजी
🔳 लगातार बढ़ते उत्पात से परेशान हुई रतौडा गांव की महिलाएं
🔳 बाहरी क्षेत्रों से लाकर गांव में बंदर छोड़ने का जताया अंदेशा
🔳 जल्द बंदर पकड़ने को अभियान न चलाने पर किया आंदोलन का ऐलान
[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]
बेतालघाट ब्लॉक के रतौडा गांव में बंदरों के आंतक से परेशान महिलाओं का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। महिलाओं ने हाथों में डंडे लेकर बंदर भगाने के अभियान चलाया। मुख्य सड़क पर नारेबाजी कर लगातार बंदर पकड़ने को अभियान चलाए जाने की मांग उठाए जाने के बावजूद अनदेखी पर रोष जताया। दो टूक चेतावनी दी की जल्द अभियान नहीं चलाया गया तो वन विभाग के खिलाफ आंदोलन शुरु कर दिया जाएगा।
गांवों में बंदरों व जंगली जानवरों के आंतक से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो चुका है। खेतीबाड़ी बर्बाद होने के साथ ही बंदर व जंगली जानवर गांव के लोगों पर हमलावर भी हो जा रहे हैं। बुधवार को कोसी घाटी स्थित रतौडा गांव की महिलाएं बंदरों के बढ़ते आंतक से परेशान होकर घर का चूल्हा चौका छोड़ हाथों में डंडे लेकर घरों से निकल आई। मातृशक्ति ने गांव से बंदरों को भगाने का अभियान चलाया। कहा कि बंदर खेती को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं भगाने पर काटने दौड़ रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लगने लगा है। बंदरों के झुंड स्कूल के रास्ते में बैठे रहते हैं। घरों के अंदर घुसकर तक सामान उठा ले जा रहे हैं। कई लोगों को घायल तक कर चुके हैं। आरोप लगाया की बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अंदेशा जताया की रात को बाहरी क्षेत्रों से लाकर बंदरों को गांव के नजदीक छोड़ दिया जा रहा है। कहा कि कई बार बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग से अभियान चलाने की मांग भी उठाई जा चुकी है बावजूद सुध नहीं ली जा रही। महिलाओं ने एक स्वर में बंदरों को पकड़ने की मांग उठाई। चेताया कि यदि समय रहते सुध नहीं ली गई तो वन विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान हेमा दरमाल, रेनू दरमाल, हीरा दरमाल, चंद्रिका मेहरा, विमला देवी, रेखा, लछिया देवी, प्रेमा दरमाल, हीरा, पना, हेमा, हंसी, ज्योति, ललिता देवी आदि मौजूद रहे।
