◾कुमाऊं दौरे पर रहते कांग्रेसी नेता पहुंचे थे बाबा के दर
◾ वापस लौटने के बाद मिली थी राष्ट्रपति पद की कमान
◾किस्मत बदलने वाले बाबा के दर पर रोजाना उमड़ रहे हजारों श्रद्धालु
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
आस्था के केंद्र कैंची धाम में रोजाना हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। देश के अलग अलग राज्यों के साथ ही विदेशों से भी श्रद्धालु बाबा के दर पर मत्था टेकने कैंची धाम पहुंचते हैं। किस्मत बदलने वाले बाबा की लीलाएं भी विश्वविख्यात है। रोजाना बाबा के दर पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या से बाबा पर आस्था व विश्वास और बढ़ जाता है।
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित कैंची धाम एक सुंदर आश्रम है। प्रकृति की गोद में एक आध्यात्मिक पड़ाव प्रदान करता है। इस तीर्थस्थल की स्थापना साठ के दशक में नीम करौली बाबा ने की। बाबा नीम करौली ने हनुमान को समर्पित एक मंदिर बनवाया। कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। उस दिन लाखों श्रद्धालु बाबा के दर पर जुटते है। बाबा की लीलाएं भी अजब गजब है। जानकारों के मुताबिक हनुमान बाबा नीम करोली के गुरु थे जब भी कोई बाबा नीम करोली के पैर छूता तो वह भक्तों को मना देते। कहते की हनुमान जी का स्मरण कर उनके ही पैर छुए। जानकारो के मुताबिक वर्षों पहले कांग्रेसी नेता डा. शंकर दयाल शर्मा कुमाऊं दौरे के दौरान बाबा नीम करौली के पास पहुंचे। काफी देर तक डा.शंकर दयाल शर्मा हाथ जोड़कर बाबा के सामने खड़े रहे। बाबा ने प्रश्न किया कि क्या चाहिए तब भी डा. शंकर दयाल शर्मा हाथ जोड़कर ही खड़े रहे तब बाबा ने वहां मौजूद लोगों से पूछा कि देश की राजनीति में सबसे बड़ा पद कौन सा है तब लोगों ने बाबा को बताया कि राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च है। बाबा ने बिना समय गंवाए तत्काल डा. शंकर दयाल शर्मा को राष्ट्रपति बनने का आशीर्वाद दे डाला। कुछ ही दिनों बाद डा. शंकर दयाल शर्मा देश के राष्ट्रपति बने। बाबा के तमाम किस्से बाबा के दर पर उमड़ रही भक्तों की भीड़ व श्रद्धा बाबा की भक्ति को और बढ़ा देती है।
लगता है बाबा ने स्वयं थामी हो कमान
स्थापना दिवस पर पुलिस प्रशासन समेत तमाम विभागों के लोग व्यवस्था बनाने में जुट जाते हैं। सुबह होने के साथ ही बाबा भक्तों की कतार लगने लगती है। दिन चढ़ने के साथ ही भक्तों की संख्या में लगातार इजाफा होता है। शाम तक श्रद्धालुओं की संख्या लाखों पहुंच जाती है।लाखों की संख्या में भक्तो के पहुंचने के बाद भी व्यवस्था रत्ती भर नहीं डगमगाती।ऐसा लगता है मानो मेले की कमान स्वयं बाबा नीम करौली थामे हुए हो।
