= इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं व अन्य विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती ना होने पर जताई नाराजगी
= शिक्षकों के ना होने से स्वजन नौनिहालों का करा रहे नगरीय क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों में दाखिला
= गांव पर पड़ रही पलायन की मार
(((टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
राजकीय इंटर कॉलेज तथा सुदूर गांव में स्थित विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरे जाने से व्यापारियों व पंचायत प्रतिनिधि ने शिक्षा विभाग पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। कई बार आवाज उठाए जाने के बावजूद कार्रवाई न होने से नाराजगी जताई है। शिक्षकों की व्यवस्था प्रवक्ता और शिक्षकों की व्यवस्था ना होने से नौनिहालों का भविष्य अंधकार में होता जा रहा है।
पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लाख दावे किए जाएं पर धरातल में दावे खोखले साबित हो रहे है। दावों के उलट हकीकत की तस्वीर दूसरी है। कई विद्यालयों में प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं तो कुछ विद्यालयों में अस्थाई व्यवस्था के तहत काम चलाया जा रहा है। इंटर कॉलेजों में महत्वपूर्ण विषयो के प्रवक्ताओं के पद रिक्त पड़े होने से नौनिहाल व अभिभावक परेशान हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार पटरी से उतरती शिक्षा व्यवस्था से नौनीहालो के स्वजन अब पलायन को मजबूर हैं। नगरीय क्षेत्रों में नौनिहालों का दाखिला कराया जा रहा है। ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश सचिव शेखर दानी, पूर्व ग्राम प्रधान पूरन लाल साह, व्यापारी नेता महिपाल सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, मदन मोहन सुयाल, कुबेर सिंह जीना आदि व्यापारियों के अनुसार कई बार विद्यालयों में रिक्त पदों पर तैनाती किए जाने की मांग उठाई जा चुकी है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही मजबूरी में स्वजन नौनिहालों समेत गांवों से पलायन करने को मजबूर है। पंचायत प्रतिनिधि व व्यापारियों ने इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं की तैनाती तथा अन्य विद्यालयों में स्थाई रूप से शिक्षकों की तैनाती किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। चेतावनी दी है कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो शिक्षा विभाग के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
