🔳 नेताओं व अफसरों की उपेक्षा से जाख गांव के ग्रामीणों में गुस्सा
🔳 सड़क सुविधा समेत कई मूलभूत जरूरतें बन चुकी सपना
🔳 गर्भवती महिलाओं व बुजुर्गो को डोली से सड़क मार्ग तक पहुंचाना नियति
🔳 कई बार सुविधाओं को उठ चुकी आवाज बावजूद आज तक नहीं ली गई सुध
[[[[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]]]]]
ब्लॉक के जाख गांव के ग्रामीण की आंखे विकास की राह देख पथरा गई है पर विकास की रोशनी गांव तक पहुंचने का नाम नहीं ले रही। सड़क सुविधा समेत कई मूलभूत जरुरतों से तरस रहे ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। पांच वर्ष पूर्व आपदा से भारी नुकसान के बावजूद नेताओं व अफसरों के गांव की सुध न लेने पर नाराजगी भी है। ग्रामीणों के अनुसार नेताओं ने गांव के लोगों को महज वोटबैंक समझ लिया है।
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे से सटे जाख गांव में करीब साढ़े सौ ग्रामीण लोकसभा, विधानसभा तथा पंचायत चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते हैं पर बड़े बड़े दावे व वादे करने वाले नेता गांव की सुध लेने को तैयार नहीं है। चुनाव के दौरान दुख दर्द का साथी बताने वाले लोगों के चुनाव के बाद मुंह मोड़ लेने से गांव के लोग बेहद मायूस हैं। विकास की रफ्तार में शामिल गांवों की तस्वीर देख जाख, सिलौर, जमरानी, सरिया आदि गांवों के लोग अपने गांव की हालत देख निराश हो जाते हैं। सड़क सुविधा उपलब्ध न होने से डोली, कुर्सी व अन्य संसाधन जुटाकर बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं को पैदल दूरी तय करने के बाद सड़क तक पहुंचाता जाता है। फल व सब्जी उत्पादक पट्टी होने से किसान उपज को सिर पर रखकर रातीघाट क्षेत्र तक पहुंचाते हैं जहां से फिर उपज वाहनों के जरिए बड़ी मंडियों को भेजी जाती है। बीते पांच वर्ष पूर्व आपदा में गांव में सार्वजनिक रास्तों व ग्रामीणों की खुद की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा पर आज तक किसी भी जिम्मेदार नेता व अधिकारी ने गांव पहुंचने की जहमत नहीं उठाई। गांव की लगातार की जा रही उपेक्षा से ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। स्थानीय चंदन सिंह नेगी, गोधन सिंह अधिकारी, चंदन सिंह अधिकारी, नैन सिंह, हेम सिंह ने आरोप लगाया की गांव के लोगों को महज वोट बैंक के रुप में इस्तेमाल किया जा रहा है। चुनाव के बाद समस्याओं का समाधान तो दूर नेता गांव में दिखते तक नहीं है। सड़क निर्माण व विकास तो सपना बन चुका है। खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। बहरहाल हाईवे से सटे जाख गांव की उपेक्षा जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न जरुर लगा रही है।
