◾ तीन वर्ष पूर्व आपदा में ध्वस्त हाईवे के हालत आज भी जस के तस
◾ खतरनाक स्थानों पर मिट्टी व पत्थर का घेरा बना कर डाली इतिश्री
◾जान हथेली पर रख आवाजाही को मजबूर हो चुके यात्री
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
कुमाऊं के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग की अनदेखी किसी से छिपी नहीं है। आपदा को तीन बरस बीतने के बावजूद खतरनाक स्थानों पर दुर्घटना टालने को मरम्मत तो छोड़िए सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने तक में एनएच विभाग फेल साबित हो चुका है। पर्वतीय क्षेत्रों को आने जाने वाले यात्री जान हथेली में रख आवाजाही को मजबूर हो चुके हैं। जोखिम भरे हाइवे की सुध न लिए जाने पर व्यापारियों ने नाराजगी जताई है। जल्द हाइवे के खतरे वाले स्थानों को दुरुस्त किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
दरअसल तीन वर्ष पूर्व कुमाऊं की लाइफ लाइन कहे जाने वाले अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे को बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया। जगह जगह भूधंसाव से हाइवे ध्वस्त हो गया। कई दिनों तक आवाजाही ठप रही। बारिश थमने के बाद दोपांखी, रातीघाट, भोर्या बैंड, जौरासी आदि क्षेत्रों में हाइवे से सटी पहाड़ी को लोडर मशीन से काटने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आवाजाही सुचारु की गई। आपदा को तीन वर्ष का समय बीतने के बावजूद आज तक स्थित जब की तस है। भूधंसाव वाले स्थानों की मरम्मत तो दूर उक्त क्षेत्रों में सुरक्षित यातायात के लिए ठोस प्रबंध तक नहीं किए जा सकें है। महज मलबा व पत्थर टाल इतिश्री कर दी गई है। ऐसे में लगातार जोखिम बना हुआ है। रात के वक्त खतरा दो गुना बढ़ जा रहा है। बावजूद एनएच प्रशासन को खतरा नजर नहीं आ रहा है। व्यापारी नेता विक्रम सिंह बिष्ट, पंकज नेगी, हरीश चंद्र, कुबेर सिंह जीना ने आरोप लगाया है की कई बार खतरे वाले स्थानों पर सुरक्षित यातायात को ठोस उपाय किए जाने की मांग उठाई जा चुकी है बावजूद संबंधित विभाग सुध नहीं ले रहा। हाइवे पर आवाजाही करने वाले यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। मनीष तिवारी, सुनील मेहरा, फिरोज अहमद, मनोज नैनवाल, कैलाश कांडपाल, राकेश जलाल, आंनद नेगी, मनीष नेगी, हरीश कुमार, पंकज भट्ट आदि ने हाइवे पर खतरे वाले स्थानों पर यात्रियों की सुरक्षा को ठोस कदम उठाए जाने की मांग उठाई है। चेतावनी दी है की यदि अनदेखी की गई तो फिर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
