◾ प्रतिवर्ष कोसी का उफान कृर्षि भूमि को कर रहा बर्बाद
◾ लगातार नुकसान से घटना जा रहा खेतीबाड़ी का रकबा
◾पंचायत प्रतिनिधियों व किसानों ने जमीन बचाने को उठाई आवाज
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))

कोसी नदी से सटी कृर्षि भूमि को बाढ़ के उफान से बचाने को सुरक्षा कार्य किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। किसानों व पंचायत प्रतिनिधियों ने कृर्षि भूमि बचाने को ठोस बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। किसानों के अनुसार कोसी नदी प्रतिवर्ष कृर्षि भूमि को नुकसान पहुंचा रही है।
बेतालघाट ब्लॉक के तमाम गांवों के किसानों की कृर्षि भूमि कोसी नदी से सटी हुई है। नदी का वेग बढ़ने पर कृर्षि भूमि को बड़ा नुकसान पहुंचता है। वर्ष1993, 2010 तथा 2020 – 21 में उफान में आई कोसी नदी ने किसानों की कृषि भूमि को तबाह कर डाला। खेत रोखड़ में तब्दील हो गए। नुकसान का उचित मुआवजा भी नहीं मिल सका। लगातार नुकसान से बढेरी, वर्धो, रतौड़ा, नैनीचैक, तिवारीगांव, आमबाडी, सोनगांव, बसगांव सिमलखा, धनियाकोट आदि गांवों के किसानों की कृषि भूमि का रकबा घटता ही जा रहा है जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है पूर्व में भी कई बार कृषि भूमि के आसपास मजबूत बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाने की मांग उठाई जा चुकी है बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो सकी। प्रतिवर्ष नुकसान बढ़ता ही जा रहा है। ग्राम प्रधान शेखर दानी, कोसी घाटी जन विकास समिति के दयाल दरमाल, बिशन सिंह जंतवाल, हीरा सिंह, नारायण सिंह, जगमोहन सिंह आदि लोगों ने कृर्षि भूमि बचाने को बाढ़ सुरक्षा के ठोस उपाय किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। चेताया है कि उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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