= गोभी व शिमला मिर्च की बुवाई शुरू पर खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी
= आखिरकार खुद ही सिंचाई गूल को दुरुस्त करने की शुरू की कवायद
= उपेक्षा पर जताया रोष, अनदेखी पर चढ़ा पारा

(((टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))

आपदा को सात माह से भी अधिक का समय बीत जाने के बावजूद गांवों में सिंचाई व पेयजल योजनाएं बदहाल है। कई बार ग्रामीण योजनाओं को दुरुस्त करने की मांग उठा चुके हैं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही ऐसे में अब बेतालघाट ब्लॉक के डोबा गांव के काश्तकारों ने खेतों तक पानी पहुंचाने को बनी गुल को दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मिर्च व फूलगोभी की उपज की बुवाई शुरू होने को है पर खेतों तक सिंचाई के पानी को कोई सुध नहीं ली जा रही ऐसे में गांव के लोगों को खुद ही आगे आना पड़ रहा है।
डोबा गांव के करीब डेढ़ सौ से ज्यादा किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने को शिप्रा नदी के समीप हैंड पंप योजना वर्षों से ठप है। किसानों के खेतों तक कलवागाढ़ गधेरे से सिंचाई गूल के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है पर अक्टूबर में हुई मूसलाधार बारिश के बाद गूल भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई जिस कारण खेत पानी को मोहताज हो गए कई बार ग्रामीणों ने गूल को मरम्मत की आवाज उठाई पर कोई सुनवाई ना हो सकी। कई उपज प्रभावित होती चली गई। लॉकडाउन के बाद आई आपदा ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया अब सब कुछ ठीक होने की उम्मीद में किसानों ने खेतों को रुख किया था तो गूल के क्षतिग्रस्त होने से सारी उम्मीदें धराशाई हो गई।मंगलवार को गांव के किसानों ने खुद ही गूल की मरम्मत का जिम्मा उठाया। गांव के किसान गूल की मरम्मत में जुट गए। किसानों ने आरोप लगाया कि कई बार गूल की मरम्मत की उठाई आवाज उठाई जा चुकी है पर कोई सुनने को तैयार नहीं। ऐसे में गांव के लोगों को ही आगे आना पड़ रहा है। स्थानीय मनोज सिंह बिष्ट, हरीश सिंह, प्रदीप बिष्ट, राजेंद्र सिंह, आनंद सिंह आदि ने गूल को दुरुस्त करने का कार्य शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार संबंधित विभाग अपेक्षा पर आमादा है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा फिलहाल गूल के जरिए खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचा कर फूलगोभी व मिर्च की बुवाई प्राथमिकता है।