= प्याज की पौध में लगी बीमारी उपज चौपट
= हजारों कुंतल प्याज का उत्पादन करने वाले क्षेत्र में प्रभावित हो गई प्याज की खेती
= बड़ी मंडियों को प्याज भेजने वाले किसान खुद के लिए प्याज को तरसे
(((ब्यूरो चीफ विरेन्द्र बिष्ट/फिरोज अहमद/भीम बिष्ट की रिपोर्ट)))
दो वर्ष लॉकडाउन में नुकसान उठाने के बाद आपदा से हुए नुकसान से किसान अभी उभर भी नहीं सके थे कि अब कोसी घाटी में प्याज की उपज में बीमारी लगने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बेतालघाट ब्लॉक के तमाम गांवों में प्याज की उपज प्रभावित हो चुकी है। हजारों कुंतल प्याज का उत्पादन करने वाले कोसी घाटी के किसान इस वर्ष खुद के प्याज के लिए तरस गए हैं। क्षेत्रवासियों ने किसानों को उचित मुआवजा दिए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
बेतालघाट ब्लॉक के तमाम गांवों में प्याज की बंपर पैदावार होती है। बड़ी मंडियों तक प्याज भेजा जाता है। जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा होता है पर बीते दो वर्ष लॉकडाउन व उसके बाद आई आपदा ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया। अब सब कुछ ठीक होने की उम्मीद में किसानों ने वापस खेतों की ओर रुख रुख कर दिसंबर में प्याज की बुवाई की पर इस बार किसानों की किस्मत फिर धोखा दे गई। किसानों के अनुसार प्याज के पौध को विशेष प्रकार की बीमारी ने चपेट में ले लिया है। पौधो में गलन आ गई है जिससे काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई किसानों ने बैंकों से ऋण लेकर भी प्याज की बुआई की थी पर अब नुकसान होने से बैंकों की ऋण तक अदा नहीं किया जा सका है। बेतालघाट के हल्सों,कौरण, वर्धो, खैरनी, धारी, थापली, धनियाकोट, सिमलखा आदि तमाम गांवों में प्याज की उपज प्रभावित हो चुकी है। काश्तकार बिशन जंतवाल, नारायण सिंह, बचे सिंह, दीवान सिंह, प्रताप सिंह, जगत सिंह, राजेंद्र सिंह, इंदर सिंह आदि ने प्रभावित उपज का मुआवजा दिए जाने की मांग की है। इधर जिला उद्यान अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार के अनुसार उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश दिए जाएंगे। किसानों की उपज को बिमारी से बचाने को समुचित दवाइयां उपलब्ध हैं।
