= कैंची क्षेत्र के समीपवर्ती तोक के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरसे
= पेयजल संकट बढ़ने पर खुद ही योजना के पाइप दुरुस्त करने को जुटे
= संबंधित विभाग पर लगाया उपेक्षा का आरोप
(((हरीश चंद्र/सुनील मेहरा/भरत बोहरा/पंकज भट्ट की रिपोर्ट)))
विभागीय उपेक्षा से आहत गांवों के लोग अब खुद ही योजनाओं को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। कैंची क्षेत्र में पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने पेयजल योजना को दुरुस्त करने को कार्य शुरू कर दिया है। विभागीय उपेक्षा पर ग्रामीणों ने रोष भी जताया है।
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित कैंची क्षेत्र के समीपवर्ती तोक में करीब दस परिवार आपदा के बाद से ही बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। कई बार आवाज उठाई गई पर कोई सुनवाई ना हो सकी। गांव के लोगों को उनके ही हाल पर छोड़ दिया गया। गांव के लोग दूरदराज से पानी लाने को मजबूर हो गए। जब विभागीय अधिकारियों ने अनसुनी कर दी तो ग्रामीणों को खुद ही आगे आना पड़ा। गांव के लोगों ने पेयजल योजना की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। सोमवार को ग्रामीण पेयजल योजना की पाइप लाइन दुरुस्त करने में जुट गए। विभागीय उपेक्षा से ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। आरोप लगाया कि विभाग उपेक्षा पर आमादा है। योजना को दुरुस्त करने में दीवान बिष्ट, वीरेंद्र सिंह, ललित बिष्ट, नैन सिंह, रवि बिष्ट, जीवन सिंह, पान सिंह बिष्ट, सुरेंद्र सिंह आदि जुटे रहे।
