🔳 सिमलखा अस्पताल में चिकित्सक का इंतजार
🔳 महज फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा पशु अस्पताल
🔳 खुद की भूमि उपलब्ध न होने से किराए के कमरे में चल रहा राजकाज
🔳 पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने लगाया उपेक्षा का आरोप
[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]

खेतीबाड़ी पर संकट गहराने के साथ ही गांवों में पशुपालन कार्य पर भी विभागीय उपेक्षा भारी पड़ रही है। बेतालघाट ब्लॉक के सिमलखा गांव में स्थित पशु अस्पताल लंबे समय से चिकित्सक विहीन है। महज फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित अस्पताल से पशुपालकों को समुचित लाभ नहीं मिल रहा वहीं अस्पताल के लिए आजतक पशुपालन विभाग जमीन तक नहीं ढूंढ सका है जिस कारण अस्पताल किराए के भवन में ही संचालित हो रहा है।
गांवों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। स्कूलों में शिक्षक व अस्पतालों में चिकित्सकों का टोटा पड़ा हुआ है। खेतीबाड़ी पर जंगली जानवरों का आंतक भारी पड़ चुका है तो वहीं अब गांवों में आय का एकमात्र जरिया पशुपालन भी खतरे की जद में आ चुका है। सिमलखा व आसपास के गांवों के सैकड़ों पशुपालकों को पशु अस्पताल में चिकित्सक के न होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। एकमात्र फार्मासिस्ट के भरोसे पशु अस्पताल संचालित हो रहा है। चिकित्सक ने होने से पशुपालकों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है मजबूरी में पशुपालक दूर दराज भटकने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान ममता भंडारी ने भी चिकित्सक की तैनाती न होने पर गहरी नाराजगी जताई है। पशु अस्पताल के किराए के भवन में संचालित होने पर भी चिंता व्यक्त की है। ग्राम प्रधान ने जल्द चिकित्सक की तैनाती किए जाने की मांग उठाई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य कैलाश बुदलाकोटी, आरटीआई कार्यकर्ता कृपाल सिंह मेहरा, कुलदीप सिंह, विरेन्द्र सिंह आदि ने गांव में पशु अस्पताल के खुद के अपने केंद्र पर संचालित किए जाने पर जोर दिया है। दो टूक कहा की उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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