◾करोड़ों रुपये की लागत से किए जा रहे कार्य सवालों के घेरे में
◾ जनहित के कार्यों में लापरवाही से चढा़ क्षेत्रवासियों का पारा
◾ लापरवाही बरतने वालो के खिलाफ उठाई कार्रवाई की मांग
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
शिप्रा नदी में छह करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से किए जा रहे बाढ़ सुरक्षा कार्य सवालों के घेरे में आ गए हैं। पहले गुणवत्ता तथा अब बगैर पानी निकाले बुनियाद डाले जाने पर स्थानीय लोगों ने रोष जताया है। जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही किए जाने पर कार्रवाई की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों ने कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की पुरजोर मांग की है। चेतावनी दी है की यदि मनमाना रवैया अपनाया गया तो फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने गरमपानी खैरना बाजार क्षेत्र को बाढ़ के खतरे से बचाने को लगभग छह करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। बजट मिलने पर लोगों को बाढ़ का खतरा कम होने की उम्मीद जगी पर जन सुरक्षा से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरतने से क्षेत्रवासियों में गहरी नाराजगी है। गुणवत्ताविहीन कार्य किए जाने का मामला उठने के बाद अब तहसील के समीप आबादी के नजदीक सुरक्षा कार्य की बुनियाद डालने को खुदाई किए जाने के बाद बगैर पानी निकासे के बुनियाद डाले जाने का मामला तूल पकड़ गया है। स्थानीय दयाल सिंह पिनारी ने आरोप लगाया की पानी में ही बुनियाद डालने से जनहित से खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। भारी भरकम बजट होने के बावजूद अधिकारियों की शह पर लापरवाही बरती जा रही है। मुनाफे के फेर में गुणवत्ताविहीन कार्य करवाया जा रहा है। बगैर पानी निकासी के डाली गई बुनियाद टूटने भी लगी है । स्थानीय गंगा सिंह, रविन्द्र सिंह, गजेंद्र नेगी, कैलाश पिनारी आदि ने दो टूक कहा है कि मनमानी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता गणेश पांडे के अनुसार पानी हटाए जाने के बाद ही बुनियाद डाले जाने के निर्देश दिए गए हैं।
