🔳 पचास मीटर ऊंचाई व सात सौ मीटर लंबाई में एंकरिंग कार्य शुरु
🔳 दूसरे चरण में ग्रांउटिग के बाद मजबूत पकड़ वाली लगेगी घास
🔳 21 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से करेगा खतरा
🔳 टनकपुर हाईवे पर स्वाला क्षेत्र में भी किया गया है इसी तकनीक का इस्तेमाल
[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]

अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर अतिसंवेदनशील लोहाली की पहाड़ी पर हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल कर खतरा टालने का कार्य शुरु कर दिया गया है। लगभग 21 करोड़ रुपये के बजट से पहले चरण में लगभग पचास मीटर की ऊंचाई तक बूम कंप्रेशन मशीन के जरिए एंकरिंग का कार्य शुरु हो चुका है। हिमाचल, बद्रीनाथ व टनकपुर हाईवे पर स्वाला में इस तकनीक के सफल होने के बाद अब अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर लोहाली की खतरनाक पहाड़ी से खतरा टालने को हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हाईवे पर लोहाली स्थित अतिसंवेदनशील पहाड़ी अब हाईटेक तकनीक का माडल बनेगी। करीब एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आकर हो चुकी है। पहाड़ी से लगातार भूस्खलन होने से आवाजाही भी प्रभावित हो जाती है। खतरा टालने को लगातार मांग उठने के बाद हरकत में आए एनएच प्रशासन ने एचटीसी की मदद से कई दौर के सर्वे के बाद प्रस्ताव तैयार कर सड़क व भूतल मंत्रालय को भेजा। सड़क व भूतल मंत्रालय ने भी मामले को गंभीरता से ले करीब 21 करोड़ रुपये के बजट को हरी झंडी दी। बजट की स्वीकृति के बाद अब पहाड़ी से खतरा टालने को कार्य शुरु कर दिया गया है। पहले चरण में बीस से अधिक श्रमिक बूम कंप्रेशन मशीन की मदद से अतिसंवेदनशील पहाड़ी पर करीब पचास मीटर ऊंचाई तथा लगभग सात सौ मीटर लंबाई में एंकरिंग कार्य में जुट गए हैं। लोहे की लंबी छड़ नुमा राॅड को विशेषज्ञों की देखरेख में लगभग छह मीटर पहाड़ी के अंदर डाला जा रहा है। एंकरिंग कार्य के बाद ग्राउटिंग कार्य शुरु होगा जिसके बाद पहाड़ी को जाल से बांध दिया जाएगा। खास बात यह है की अंतिम चरण में पहाड़ी पर मजबूत पकड़ वाली घास के बीज का छिड़काव कर उसे प्राकृतिक रुप दिया जाएगा। कार्यदाई संस्था के साइड इंजीनियर शिवेंद्र सिंह के अनुसार निगरानी के साथ कार्य किया जा रहा है। कार्य पूरा करने की समय सीमा डेढ़ वर्ष है। तय समय पर गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा किया जाएगा। गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।

कोसी की उफान से टकराएगी विशेष तकनीक की सुरक्षा दीवार

कोसी नदी के उफान से हाईवे को बचाने के लिए भी विशेष प्रबंध किए जाएंगे। नदी क्षेत्र में विशेष तकनीक से करीब साढ़े सात सौ मीटर लंबी सुरक्षा दीवार तैयार की जाएगी। विशेष डिजाइन से तैयार की जाने वाली सुरक्षा दीवार में उच्च गुणवत्ता की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। पूर्व में करोड़ों रुपये की लागत से बने फ्लाई ओवर को कोसी नदी के वेग ने तहस नहस कर डाला था। बरसात में नदी के तेज बहाव के मद्देनजर विशेष डिजाइन की सुरक्षा दीवार के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

दस वर्ष तक रखरखाव करेगी कार्यदाई कंपनी

लोहाली की अतिसंवेदनशील पहाड़ी पर किए जा रहे सुरक्षा कार्यों की देखरेख का जिम्मा भी कार्यदाई संस्था ही संभालेंगी। अमूमन निर्माण कार्यों की देखरेख का जिम्मा तीन व पांच वर्ष रखा जाता है पर लोहाली क्षेत्र में
किए जा रहे विशेष तकनीक के कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी दस वर्ष रखी गई है। प्रोजेक्ट मैनेजर प्रवेश देव के अनुसार दस वर्ष की अवधि तक देखरेख की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

पहुंचने लगी है हाईटेक मशीनें

लोहाली की अतिसंवेदनशील पहाड़ी से खतरा टालने को पहाड़ी से गिरने वाले मलबे को अहतिआतन हटाने के बाद अब हाईटेक मशीनों के जरिए कार्य शुरु होगा। पहाड़ी तथा नदी की ओर मशीनों के जरिए सुरक्षात्मक कार्य किए जाएंगे। निर्माण स्थल पर हाईटेक मशीनें पहुंचनी शुरु हो गई है।

सहायक अभियंता

विशेष तकनीक से किया जा रहे कार्यों की निगरानी की जा रही है। तय समयावधि पर कार्य पूरा करवाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रकाश सिंह रौतेला, सहायक अभियंता, एनएच

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