🔳 रामगढ़ ब्लॉक के तमाम गांवों के है यहीं हालात
🔳 समय पर बारिश न होने व जंगली जानवरों का आंतक बना कारण
🔳 खेती से हो रहे नुकसान से किसानों का खेतीबाड़ी से हो चुका मोहभंग
🔳 अधिकांश गांवों में बंजर होते जा रहे उपजाऊ खेत
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]
रामगढ़ ब्लॉक के तमाम गांवों में पांचवें वर्ष भी धरतीपुत्रों ने गेहूं की बुआई से दूरी बना ली है। जंगली जानवरों के लगातार बढ़ रहे आंतक व समय पर बारिश न होने से किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। जिन खेतों में कभी फसलें लहलहाती थी आज वहीं खेत बंजर पड़े हुए हैं।चौपट हो चुकी खेती से किसान मायूस हैं। जनप्रतिनिधियों ने सिंचाई की उचित व्यवस्था के साथ ही जंगली जानवरों से खेती बचाने को तारबाड़ किए जाने की मांग उठाई है। अंदेशा जताया है की समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो गांवों में खेती इतिहास बन जाएगी।
एक ओर किसानों की आय दोगुनी करने के खूब ढोल पीटे जा रहे हैं वहीं रामगढ़ ब्लॉक के मोना, चापड़, बैरोली, गैराड़ी लटवाल, गाज, कलेसीमा, कफूड़ा, कुमाटी समेत तमाम गांवों में लगातार पांचवें वर्ष भी किसान गेहूं की बुआई नहीं कर सके हैं। लगातार बिगड़ रही स्थित से क्षेत्र के किसानों की चिंता व निराशा बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार जंगली सुअर व बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि खेतों में बीज डालना भी जोखिम भरा हो गया है। जैसे ही फसल उगती है, वैसे ही जंगली जानवर उसे पूरी तरह नष्ट कर देते हैं। जिससे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और मेहनत पर पानी फिर जाता है। पिछले तीन–चार वर्षों से यही हालात बने हुए हैं पर अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। बारिश न होने के कारण भी इस वर्ष गेहूं की बुवाई संभव नहीं हो सकी। सिंचाई की कोई स्थाई व्यवस्था न होने से किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। खेतीबाड़ी से किसानों का मोहभंग होने से गांवों में खेत बंजर हो चुके हैं।ग्राम प्रधान मोना लता राणा, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेन्द्र सिंह बिष्ट, सरपंच राकेश राणा, ग्राम प्रधान कफुड़ा, कुमाटी प्रमोद कुमार, हरेंद्र नेगी, नीरज मेहरा, हरीश मेहरा, अमित मेहरा, मनोज बिष्ट, सुन्दर नेगी, सचिन नेगी आदि ग्रामीणों ने गांवों में जंगली जानवरों से खेती बचाने को सुरक्षा के ठोस उपाय करने तथा सिंचाई पंपिंग योजना का निर्माण किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
