= दो सप्ताह से भी अधिक समय से चरमराई पेयजल आपूर्ति
= संबंधित विभाग पर गांव की उपेक्षा का आरोप
= जल्द व्यवस्था में सुधार ना होने पर आंदोलन का ऐलान

(((ब्यूरो चीफ विरेन्द्र बिष्ट/फिरोज अहमद/सुनील मेहरा/भीम बिष्ट की रिपोर्ट)))

गांवों में पेयजल संकट सिर चढ़कर बोल रहा है। ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है। कोसी नदी का पानी पीना मजबूरी बन चुका है बेतालघाट ब्लॉक के बसगांव क्षेत्र में करीब चालीस परिवार पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई जा चुकी है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
तमाम गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। बेतालघाट ब्लॉक के बसगांव क्षेत्र के ग्रामीण मजबूरी में कोसी नदी का पानी पी रहे हैं।करीब दो सप्ताह से भी अधिक समय से पेयजल आपूर्ति चरमरा गई है। दूरदराज स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों के साथ ही कोसी नदी का पानी पीना मजबूरी बन चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार पेयजल व्यवस्था में सुधार की मांग उठाए जाने के बावजूद विभागीय अधिकारी अनसुनी कर रहे हैं जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। पेयजल संकट के कारण कई कार्य प्रभावित हो जा रहे हैं। स्थानीय इंदर सिंह बोहरा, मोहन सिंह, मान सिंह, उमा देवी, मंजू देवी, मुन्नी देवी, शांति देवी आदि ने जल संस्थान की कार्यशैली पर सवाल उठाए है।दो टूक चेताया है कि यदि जल्द पेयजल आपूर्ति दुरुस्त नहीं की गई तो फिर ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया जाएगा।