🔳 दावे करने वाले प्रत्याशियों की जनहित के मामलों में संघर्ष की भूमिका टटोल रहे मतदाता
🔳 जनहित के मामले में कितनी बार आवाज उठाई, पूछ रहा मतदाता
🔳 जी हजूरी करने वालों को नकारने का मन बनाने लगे गांवों के लोग
[[[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]
पंचायत चुनाव में मतदाताओं को लुभाने को प्रत्याशियों के दावों से गांवों में व्याप्त समस्याओं का शत-प्रतिशत समाधान की उम्मीद है। ऐसा लगता है मानो वर्षों से व्याप्त समस्याओं का चुनाव जीतने के साथ ही प्रत्याशी पलक झपकते ही समाधान कर देगा। मतदाता भी चुप्पी साधे प्रत्याशियों के दावों को सुन और समझ रहा है। समस्याओं के समाधान का दावा करने वाले प्रत्याशी की जनहित को लेकर अब तक के संघर्ष को भी टटोल रहे हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पूरे चरम पर पहुंच गया है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवार नामांकन के बाद अब खुलकर मैदान में उतर गए हैं। गांवों में व्याप्त सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत कई अन्य मूलभूत समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाकर माहौल अपने पक्ष में करने की जुगत की जा रही है। दावों की बाजीगरी से मतदाता को अपने पाले में करने को कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही। मतदाता भी प्रत्येक चुनाव में प्रत्याशियों के दावों व वादों को अच्छी तरह देखने व समझने के बाद अब निर्णायक की भूमिका में हैं। बड़े बड़े दावे करने वाले उम्मीदवारों की कुंडली भी मतदाता खंगालने में जुटे हैं। शाम को गांव घरों में बरामदे में चाय की चुस्की के बीच आपसी चर्चा में प्रत्याशियों को नापा तोला जा रहा है। जनहित के मुद्दों को लेकर किस उम्मीदवार ने संघर्ष किया और कौन नेताओं व अफसरों की चुप्पी साध जी हजूरी में व्यस्त रहा इस पर भी गहनता से विचार विमर्श किया जा रहा है। सालों तक गायब रहकर अब चुनाव के दौरान दुख दर्द का साथी बताने वाले उम्मीदवारों को भी मतदाता खूब परख रही है। बहरहाल अब मतदाता अपने मत स्वरुप आशीर्वाद किसे देते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा पर इतना तय है की उम्मीदवारों के लिए मतदाताओं से छूटे दावे व वादे करना भारी पड़ने वाला है।
