◾जहां तहां खदान कर मौत के मुंह में धकेलने का लगाया आरोप
◾उपखनिज से भरे वाहनों को रोक की गई नारेबाजी
◾प्रशासन के नुमाइंदे को भी सुनाई खरी खोटी
◾मनमानी पर दे डाली उग्र आंदोलन की चेतावनी
◾जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में कार्य करने की मांग
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
शिप्रा नदी में रिवर ड्रेनिंग के नाम पर बेतरतीब ढंग से खदान किए जाने से क्षेत्र के आपदा प्रभावितों का पारा चढ़ गया। महिलाएं व पुरुष नदी क्षेत्र में पहुंच गए। नारेबाजी कर रोष जताया। उपखनिज से भरे वाहनों को भी रोक दिया गया। आरोप लगाया की मनमाने ढंग से खदान किया जा रहा है। मुनाफे के फेर में लोगों को मौत के मुंह में धकेला जा रहा है। भीषण गर्मी के बावजूद तीन घंटे तक नदी में डटी रही। दो टूक चेतावनी दी की यदि जनहित से खिलवाड़ कर मनमानी की गई तो उग्र आंदोलन शुरु किया जाएगा।
मंगलवार को आपदा का दंश झेल रहे आपदा प्रभावित परिवारों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। शिप्रा नदी क्षेत्र में बेतरतीब ढंग से किए जा रहे खदान से गुस्साई महिलाएं व पुरुष नदी क्षेत्र में जा पहुंची। आरोप लगाया की रिवर ड्रेनिंग के नाम पर जहां तहां खदान किया जा रहा है। जिन स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा के कार्य किए जाने हैं वहां भी गहरे गड्ढे कर डाले गए हैं। जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा दोगुना होने का खतरा है। आक्रोशित महिलाओं ने मनमाने ढंग से खदान कर लोगों को मौत के मुंह में धकेलने का आरोप लगाया। सूचना पर पहुंचे प्रशासन के नुमाइंदे को भी खूब खरी खोटी सुनाई। आक्रोशित मातृ शक्ति ने तीन घंटे से भी अधिक समय तक उपखनिज से भरे वाहनों को रोके रखा। दो टूक कहा की मनमानी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमानुसार रिवर ड्रेनिंग किए जाने की पुरजोर मांग उठाई। मौके पर पहुंची नायब तहसीलदार मनीषा बिष्ट ने आक्रोशित लोगों को उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। आपदा प्रभावितों ने साफ कहा की यदि मनमानी की गई तो फिर उग्र आंदोलन शुरु कर दिया जाएगा। इस दौरान ग्राम प्रधान प्रेम नाथ गोस्वामी, सुशीला बिष्ट, भगवती नैनवाल, सुनीता देवी, माधवी नैनवाल, लीला देवी, गीता गौणी, शोभा गोस्वामी, गीता गोस्वामी, भरत जलाल,भैरव नैनवाल, कैलाश नैनवाल, हरक सिंह पिनारी, श्याम सिंह गौणी, हीरा नाथ गोस्वामी, मनोहर सिंह बिष्ट, रवि पिनारी आदि मौजूद रहे।
प्रशासन पर फूटा गुस्सा
आपदा प्रभावितों ने तहसील प्रशासन पर भी खूब गुबार निकाला। आरोप लगाया की लगातार अनदेखी की जा रही है। आपदा के वक्त सरकारी वाहन से माइक में बोलकर घरों को खाली करने के एकतरफा आदेश दे इतिश्री कर दी जाती है। पर सुरक्षित स्थान पर रहने के कोई उचित व्यवस्था तक नहीं होती। स्थानीय सुशीला बिष्ट ने आरोप लगाया की दो वर्ष पूर्व आपदा के वक्त जीआइसी खैरना में बामुश्किल रहने पहुंचे। तीन दिन तक गंदा पानी पीने को मजबूर हो गए बावजूद लगातार उपेक्षा की गई। आपदा प्रभावितों ने आरोप लगाया की अब रिवर ड्रेनिंग के नाम पर नदी में जहां तहां मनमाने ढंग से खदान कर आपदा को न्यौता दिया जा रहा है। लोगों ने प्रशासन व खान विभाग के कर्मचारियों की निगरानी में ही रिवर ड्रेनिंग कराए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
