= संरक्षित प्रजाति की रोहू के अस्तित्व पर मंडराया संकट
= नदी का प्रवाह रोक किया जा रहा मछलियों का शिकार
= क्षेत्रवासियों ने उठाई कार्रवाई की मांग
(((ब्यूरो चीफ विरेन्द्र बिष्ट/फिरोज अहमद/भीम बिष्ट की रिपोर्ट)))
उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी में करंट के साथ ही कीटनाशक पदार्थ मिलाकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है। नदी में पाई जाने वाली संरक्षित प्रजाति की रोहू मछली के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा है। कीटनाशक पदार्थ से बड़ी मछली के साथ ही छोटी मछलियां भी बेमौत मारी जा रही है जिससे मछलियों का समूल नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है।
कुछ दिन शांत रहने के बाद अब एक बार फिर शिप्रा नदी में मछली मारने वाले सक्रिय हो गए हैं। कभी करंट तो कभी कीटनाशक ब्लीचिंग पाउडर मिलाकर नदी में धड़ल्ले से मछलियां मारी जा रही है नदी का प्रवाह रोक नदी क्षेत्र में करंट भी फैलाया जा रहा है जिससे मछलियां मरने के साथ ही बड़ी घटना की आशंका भी बनी हुई है वहीं ब्लीचिंग पाउडर मिलाए जाने से संरक्षित प्रजाति की रोहू मछली के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बड़ी मछलियों के साथ ही छोटी-छोटी मछलियां भी मर रही हैं। स्थानीय लोग मछली मारने वाले को कई बार खदेड़ चुके हैं पर मछली मारने वाले मनमानी पर उतारू है। कभी रामगढ़ तो कभी दोपांखी क्षेत्र में धड़ल्ले से मछलियों का शिकार किया जा रहा है। पूर्व ग्राम प्रधान पूरन लाल साह, व्यापारी नेता वीरेंद्र बिष्ट, मदन सुयाल, हरीश चंद्र, पंकज भट्ट, विजय रौतेला, मदन सिंह, अंकित सुयाल, कुबेर सिंह, फिरोज अहमद, सुनील मेहरा, पंकज नेगी, गोधन सिंह, रघुराज सिंह, दलीप सिंह नेगी, मनोज पडलिया, भरत बोहरा आदि लोगों ने नदी में मछली मारने पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही मामले में कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है।
