🔳 व्यवस्था पर एक से दूसरे विद्यालय में भेजे जा रहे शिक्षक
🔳 सरकारी स्कूलों से उठने लगा है गांवों के लोगों का भरोसा
🔳 नगरीय क्षेत्रों में प्राईवेट स्कूलों में बच्चों का एडमिशन बन रही मजबूरी
🔳 विभागीय उपेक्षा से लोगों में पनपने लगा है रोष
[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]

बेतालघाट ब्लॉक के गांवों में स्थित सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था राम भरोसे संचालित होने से गांवों के लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। ठिक ठाक छात्र संख्या वाले विद्यालयों से दूसरे विद्यालयों में व्यवस्था के तहत शिक्षक भेजे जाने पर ग्रामीणों व विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने गहरी नाराजगी जताई है। जल्द व्यवस्था में सुधार न होने पर आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
शिक्षा विभाग के लाख दावों के बावजूद बेतालघाट ब्लॉक के गांवों में स्थित शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। गांवों के लोगों का सरकारी स्कूलों से मोहभंग होता जा रहा है। लोग बच्चों को पढ़ाने के लिए नगरीय क्षेत्रों को रुख करने को मजबूर हैं ऐसे में गांव के गांव खाली होते जा रहे हैं। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से गांवों के स्कूलों में शिक्षित होने का सपना देख नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कई विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित है तो कई विद्यालयों में दूसरे विद्यालयों से व्यवस्था के तहत शिक्षक भेज पढ़ाई करवाई जा रही है। राजकीय जूनियर हाईस्कूल नैनीचैक में चालीस से अधिक नौनिहालों के बावजूद यहां दो शिक्षकों की तैनाती है उसमें से भी एक शिक्षक को व्यवस्था के तहत दूसरे विद्यालय में भेज दिया जा रहा है। ऐसे में महज एक शिक्षिका को चालीस से अधिक नौनिहालों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी सौंप दी जा रही है। स्थानीय गोपाल सिंह जैडा के अनुसार पूर्व में विद्यालय में समुचित शिक्षकों की तैनाती मांग भी उठाई जा चुकी है पर शिक्षकों की तैनाती के उलट विद्यालय से शिक्षक को इधर उधर भेजा जा रहा है जिससे विद्यालय में व्यवस्था लड़खड़ा लाजिमी है। किसान नेता दिलीप सिंह बोहरा, दयाल सिंह दरमाल ने विद्यालय से शिक्षकों को व्यवस्था पर न भेजने की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों ने भी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर विभागीय अधिकारियों पर नौनिहालों के हितों से खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाया है।