◾ आपदा प्रभावित गांव में एक सप्ताह बाद भी हालात जस के तस
◾गांव व घरों में भरा मलबा फिर कर रहा बड़ी घटना की ओर संकेत
◾अधिकारियों व विधायक के दौरे के बाद भी नहीं बदले हालात
◾ कई परिवार पानी की बूंद बूंद को भी तरसे
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))

रामगढ़ ब्लॉक के हली गांव के बाशिंदे आसमानी गड़गड़ाहट से भी दहशत में आ जा रहे हैं। सप्ताह भर पहले गांव में घुसे मलबे ने खूब कहर बरपाया। आज भी आपदा प्रभावित गांव के हालात जस के तस है। गांव तथा घरों में घुसे मलबे का निस्तारण न किए जाने से अब भी गांव पर बडा़ संकट मंडरा रहा है। बावजूद सुध नहीं ली जा रही। गांव के कई परिवार बूंद बूंद पानी तक के लिए मोहताज हो चुके हैं। ये हालत तब है जब अधिकारियों व खुद विधायक तक गांव का दौरा कर चुकी है।
बीते मंगलवार को हली गांव में तितोली सड़क मार्ग से घुसे मलबे ने काफि कहर बरपाया। कई गौवंशीय पशुओं की मलबे में दबकर मौत हो गई। ग्रामीणों के घर मलबे से पट गए। पल भर में ही खेत रोखड़ में तब्दील हो गए। ग्रामीणों ने बामुश्किल भाग कर जैसे तैसे जान बचाई। अब अफसरों की अनदेखी आपदा प्रभावित गांव पर भारी पड़ रही है। घटना को सप्ताह भर से अधिक का समय बीतने के बावजूद गांव के बीचोबीच घुसे मलबे को नहीं हटाया जा सका है। मकानों में घुसा मलबा भी जस का तस हैं। ये हालात तब है जब आपदा के दूसरे दिन ही एसडीएम कोश्या कुटोली तथा कुछ दिन पहले ही विधायक सरिता आर्या ने गांव पहुंचकर हालात सुधारने का भरोसा दिलाया था बावजूद कोई सुध नहीं ली जा सकी है। स्थानीय गोधन सिंह बिष्ट के अनुसार गांव को अब भी लगातार खतरा बना हुआ है। बारिश होने पर बड़ी घटना सामने आ सकती है बावजूद अनदेखी की जा रही है। अब तक मलबे का निस्तारण नहीं किया जा सका है जिससे भविष्य में खतरा बढ़ने की आंशका है। वहीं पेयजल व्यवस्था दुरुस्त न होने से कई परिवार पानी तक के लिए परेशान हैं। लगातार गांव की उपेक्षा किए जाने पर क्षेत्रवासियों ने भी गहरी नाराजगी जताई है। जल्द व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई है।

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