🔳 पांच दिवसीय कला कार्यशाला में करेंगे प्रतिभाग
🔳 पहले दिन कला में इस्तेमाल किए जा रहे विभिन्न माध्यमों की विशेषताओं के बारे में दी गई जानकारी
🔳 कोलार्ज पेंटिंग की महत्वत्ता व माध्यम के गुणों पर भी की गई चर्चा
🔳 एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से पहुंचे प्राध्यापकों ने साझा की अहम जानकारियां
[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]

अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय गंगरकोट (सुयालबाड़ी) में पांच दिवसीय कला कार्यशाला शुरु हो गई ।कार्यशाला में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के जवाहर नवोदय विद्यालय के कला अध्यापक प्रतिभाग कर रहे हैं। पहले दिन एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से पहुंचे प्राध्यापकों ने कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की। डिजिटल टैक्नोलॉजी से कलाकृतियों व चित्रकला पर प्रकाश डाला।
मंगलवार को जेएनवी सभागार में पांच दिवसीय कला कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के प्रोफेसर शेखर चंद्र जोशी, डा. संजीव आर्या व प्रधानाचार्य डा. पीसी उपाध्याय ने संयुक्त रुप से मां सरस्वती के चित्र के समीप दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रधानाचार्य पीसी उपाध्याय ने कहा की कार्यशाला में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड जेएनवी के कला शिक्षक अहम जानकारियां हासिल करेंगे। पहले सत्र में डा. संजीव आर्या ने शिक्षकों को कला की महत्वत्ता विषय पर जानकारी दी। पेपर क्राफ्ट के जरिए मुखौटे बनाने की विधा सिखाई। प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने कला में इस्तेमाल किए जा रहे विभिन्न माध्यमों की विशेषताओं के बारे में बताया। स्लाइड के माध्यम से देशभर में फैली विभिन्न कलाओं की जानकारी साझा की जिससे प्रतिभागियों ने देश के अलग अलग राज्यों की लोक कलाओं के बारे में जाना। प्रोफेसर ने नाखून से निर्मित कलाकृति की प्रस्तुति दे कला में प्रतिको के बारे में समझाया। कोलार्ज पेंटिंग की महत्वत्ता व माध्यम के गुणों पर भी चर्चा की गई। आर्ट इंटीग्रेशन में कला अध्यापकों की अहम भूमिका के महत्व को भी बताया। प्रतिभागी शिक्षकों ने मुखौटे व कोलार्ज पेंटिंग भी तैयार की। कार्यक्रम का संचालन भूप सिंह व वाईएस मिश्रा ने संयुक्त रुप से किया।

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