= फल्याडी़ गांव से 12 टन पिरुल एकत्र कर भेजा गया बैलपडा़व
= पांच रुपये प्रति किलो पिरूल के हिसाब से ग्रामीणों को होगा भुगतान
= जंगलों को आग से बचाने में मददगार होगी महत्वाकांक्षी योजना
(((कमल बधानी/दलिप नेगी/मनोज पडलिया/विजय रौतेला की रिपोर्ट)))
जंगलों को आग से बचाने तथा पिरुल से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की कवायद शुरू हो गई है। बकायदा बेतालघाट ब्लॉक के फल्याडी़ वन पंचायत से पिरुल से रोजगार एवं वनाग्नि रोकथाम योजना का श्रीगणेश भी कर दिया गया है। वन क्षेत्राधिकारी के अनुसार अन्य गांवों में भी जल्द योजना शुरू की जाएगी। पांच रुपये प्रति किलो पिरूल के हिसाब से ग्रामीणों को भुगतान भी किया जाएगा। पहले चरण में नैनीताल जनपद के बैलपड़ाव स्थित निजी कंपनी में पिरुल भेजा गया है।
पहाड़ में जंगलों को आग से बचाने के लिए फिर महत्वाकांक्षी पिरुल से रोजगार तथा वनाग्नि रोकथाम योजना का श्रीगणेश हो चुका है। बेतालघाट ब्लॉक के फल्याडी़ वन पंचायत से करीब 12 टन पिरूल एकत्र कर जनपद के कोटाबाग ब्लॉक के बैलपड़ाव स्थित निजी कंपनी में भेजा गया है। पिरूर का ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। मंगलवार को फल्याडी़ गांव में पिरुल एकत्र करने का अभियान चलाया गया। ग्रामीणों ने वन विभाग तथा सरपंच की अगुवाई में करीब 12 टन पिरुल एकत्र कर वाहनों के माध्यम से बैलपड़ाव भेजा गया। नैना रेंज की वन क्षेत्राधिकारी ममता चंद के अनुसार योजना के तहत पिरुल का भुगतान भी किया जाएगा। जिसमें तीन रुपये संबंधित कंपनी तथा दो रुपये वन विभाग ग्रामीणों को उपलब्ध कराऐगा। कुल जमा पांच रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान होगा। बताया की डीएफओ बीजू लाल टीआर के निर्देश पर योजना शुरू कर दी गई है। इस दौरान सरपंच कमल बधानी, सहायक वन क्षेत्राधिकारी दयाशंकर टम्टा, वन रक्षक दुर्गा सिंह, ममता देवी, रेवती देवी, चंद्रा देवी, गंगा देवी, दीवान गिरी, अनिल कुमार, उमा देवी आदि मौजूद रहे।
