◾ बाबा के अमेरिकी भक्त रिचर्ड ने अपनी किताब में किया है जिक्र
◾आज भी बाबा की प्रतिमा पर कंबल चढ़ाने कि है परपंरा
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
बाबा नीम करौली हमेशा ही कंबल ओढ़ा करते। कई भक्तों के दुखो को बाबा अपने कंबल से दूर कर देते। कंबल से कई चमत्कारिक लीलाए कर भक्तों को हैरत में डाल देते। बाबा के विदेशी भक्त रिचर्ड एलपर्ट ने अपनी किताब ‘मिरेकल ऑफ लव’ में बकायदा बाबा के बुलेटप्रूफ कंबल से जुड़ी घटना का जिक्र किया है।
बाबा नीम करोली की की चमत्कारिक लीलाए सर्वव्यापी है। एक ओर जहां भक्तों को बाबा कैंची धाम में दर्शन देते तो दूसरे ही पल बाबा भक्तों को दूसरे स्थानों में भी दिखाई देते। बताते हैं कि भक्त बाबा को सच्चे मन से याद करते तो बाबा स्वयं भक्त के घर तक पहुंच उसके दुखो को हर लेते।बाबा नीम करौली हमेशा कंबल ओढ़े रहते। कंबल से भी कई चमत्कार कर देते। बाबा के अमेरिकी भक्त रिचर्ड एलपर्ट ने अपनी किताब में बाबा के कंबल को बुलेटप्रूफ कंबल नाम दिया है। बुलेटप्रूफ कंबल के बारे में जिक्र करते लिखा है कि बाबा के कई भक्तों में फतेहगढ़ का एक बुजुर्ग दंपति भी था। बाबा के चमत्कारी कंबल की यह घटना वर्ष 1943 की है।
एक दिन बाबा अचानक बुजुर्ग दंपति के घर पर पहुंचे। और रात को वहीं रुकने की बात कही। रात में भोजन के बाद बाबा कंबल ओढ़कर ही सो गए। बुजुर्ग दंपत्ति भी बाबा के चारपाई के पास ही सो गए। रात में बाबा कराहने लगे। ऐसा लगा जैसे बाबा को कोई मार रहा हो।जैसे-तैसे रात बीत गई। बाबा ने सुबह चादर लपेटकर बजुर्ग दंपति को दी और गंगा में प्रवाहित करने को कहा। साथ ही कहा की आपका बेटा महीने भर के भीतर लौट आएगा। दंपति ने भी बाबा के आदेश का पालन कर चादर को गंगा में प्रवाहित कर दिया।एक महीने बाद बुजुर्ग दंपति का इकलौता बेटा भी बर्मा फ्रंट से घर लौट आया। वह ब्रिटिश फौज में सैनिक था और दूसरे विश्वयुद्ध के समय बर्मा फ्रंट पर तैनात था। बेटे को घर पर देख बुजुर्ग दंपति की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटे ने माता-पिता को ऐसी घटना के बारे में बताया जिसे सुनकर वो हैरान रह गए। बेटे ने कहा कि, लगभग महीने भर पहले एक दिन वह दुश्मन फौजों के बीच घिर गया और रातभर गोलीबारी होती रही. इस युद्ध में उसके सारे साथी भी मारे गए लेकिन वह अकेला बच गया। बेटे ने कहा कि मैं कैसे बच गया यह मुझे भी मालूम नहीं. उसने कहा कि उसपर खूब गोलीबारी हुई लेकिन एक भी गोली उसे नहीं लगी। रातभर वह जापानी दुश्मनों के बीच लड़ता रहा और जीवित बच गया. इसके बाद सुबह ब्रिटिश फौज की और टुकड़ी आई। दरअसल यह वही रात थी, जिस रात बाबा बुजुर्ग दंपति के घर आए और रुके थे. बुजुर्ग दंपति की आंखे भर आई कि उनका बेटा सकुशल घर वापस आ गया. साथ ही दंपति बाबा के चमत्कार को भी समझ गए थे. यही कारण है कि अपनी किताब ‘मिरेकल ऑफ लव’ में रिचर्ड एलपर्ट ने इस कंबल को बुलेटप्रूफ कंबल कहा है। आज भी कैंची धाम स्थित मंदिर में बाबा के भक्त कंबल चढ़ाते हैं।
