◾ करोड़ों रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्यो में चरम पर पहुंची लापरवाही
◾ मौके पर पहुंच व्यापारियों ने जताई आपत्ति
◾ जनहित से खुलेआम खिलवाड़ के बावजूद तंत्र बेखबर
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
शुरु से ही विवादों में घिरे बाढ़ सुरक्षा कार्यो में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। अब तहसील प्रशासन के नाक के नीचे ही नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। स्थानीय व्यापारियों ने आरोप लगाया है तहसील मुख्यालय के ठिक पीछे ही दिन के उलट रात को बाढ़ सुरक्षा कार्य किया जा रहा है। व्यापारियों ने रात के वक्त हो रहे कार्यों की जांच की पुरजोर मांग उठा कार्रवाई की मांग की है। उपजिलाधिकारी कोश्या कुटोली योगेश मेहरा के अनुसार गुणवत्तायुक्त से समझौता नहीं होने दिया जाएगा। दावा किया की आवश्यकता पड़ी तो निर्माण सामग्री का सैंपल भी जांच को भेजा जा सकता है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता के अनुसार रात को कार्य न करने के निर्देश दिए गए हैं।
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित गरमपानी खैरना क्षेत्र को बाढ़ के थपेड़ों से बचाने के लिए शिप्रा नदी पर लगभग छह करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से किए जा रहे कार्यों में लापरवाही चरम पर पहुंच गई है। पूर्व में स्थानीय लोग मिट्टी मिश्रित रेत का धड़ल्ले से इस्तेमाल का आरोप लगा चुके हैं और अब तहसील प्रशासन की नाक के नीचे ही रात के वक्त मनमाने ढंग से ब्लाक निर्माण का कार्य किया जा रहा है। व्यापारी नेता कैलाश कांडपाल, मदन सिंह मेहरा, विनोद कांडपाल ने आरोप लगाया रात के वक्त नदी क्षेत्र में मोबाइल की रोशनी में निर्माण कार्य किया जा रहा था। रात के वक्त निर्माण कार्य किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया कि तहसील मुख्यालय के ठीक पीछे ही खुलेआम नियमों के उलट कार्य किया जा रहा है जो निंदनीय है। रात के वक्त किए जा रहे कार्य पर क्षेत्रवासियों ने भी गहरी नाराजगी जता जांच की मांग उठाई है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नीरज तिवारी के अनुसार पूर्व में ही रात को कार्य न करने के निर्देश दिए गए हैं साफ कहा कि उच्चाधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया जाएगा। उप जिलाधिकारी कोश्या कुटोली योगेश मेहरा के अनुसार गुणवत्ता से समझौता नहीं होने दिया जाएगा। गुणवत्ताविहीन निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ तो सामग्री की जांच करवाई जाएगी।
