🔳 कोसी नदी से संचालित है कई महत्वपूर्ण योजनाएं
🔳 खदान से योजनाओं को नुकसान पहुंचने का अंदेशा
🔳 विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों व किसानों ने रोक लगाने की उठाई मांग
🔳 मनमानी पर आंदोलन की दे डाली चेतावनी
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]
कोसी नदी में सिंचाई व पेयजल योजनाओं के आसपास उपखनिज पट्टों की स्वीकृति पर रोक लगाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। ग्रामीणों ने खदान से योजनाओं को नुकसान का अंदेशा जताया है। भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ने भी योजनाओं को नुकसान से बचाने के पेयजल व सिंचाई योजनाओं के आसपास खदान प्रतिबंधित किए जाने पर जोर दिया है।
सफेद होने के काले कारोबार के लिए कुख्यात कोसी घाटी में कोसी नदी से कई सिंचाई व पेयजल योजनाएं संचालित है। महत्वपूर्ण योजनाओं से आसपास के तमाम गांवों को पानी की आपूर्ति की जाती है जिससे गांवो के लोग व किसान लाभान्वित होते हैं। खनन सत्र के दौरान पेयजल व सिंचाई योजनाओं के आसपास खनन पट्टे आवंटन पर रोक लगाने की मांग उठने लगी है। गांवों के किसानों ने करोड़ों रुपयों की लागत से बनी पेयजल व सिंचाई योजनाओं के आसपास खदान न कराए जाने की मांग उठाई है। आरोप लगाया की खनन विभाग मनमाने ढंग से उपखनिज पट्टों का आवंटन करता है जिससे खदान महत्वपूर्ण योजनाओं के नजदीक तक पहुंच जाता है। मनमाने ढंग से खदान होने से योजनाओं को नुकसान होने का अंदेशा भी बढ़ जाता है। भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दिलीप सिंह बोहरा ने भी किसानों की मांगों को जायज ठहरा कोसी नदी में स्थित सिंचाई व पेयजल योजनाओं के आसपास खनन प्रतिबंधित किए जाने पर जोर दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता कृपाल सिंह बोहरा ने भी मनमाना रवैया अपनाए जाने पर किसानों को साथ लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है।
