◾परिवार के सदस्य भी जी रहे मुफलिसी की जिंदगी
◾ सरकार ने कुछ वादे किए पूरे तो कुछ आज भी अधूरे
◾ कारगिल युद्ध में भराड़ीधार तोक के बेटे ने दी थी कुर्बानी
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))

भारत माता की आन, बान, शान में अपने प्राण न्यौछावर कर देने वाले बेतालघाट ब्लॉक के सिमलखा गांव के भराडी़धार तोक निवासी लांसनायक शहीद चंदन सिंह भंडारी की मां की आखिरी इच्छा राज्य सरकार ने पूरी तो कर दी पर आज भी कई वादे अधूरे ही है। शहीद के परिवार के सदस्य मुफलिसी की जिंदगी जी रहे है। शहीद का गांव आज तक सड़क सुविधा से भी वंचित हैं। देश के लिए कुर्बानी देने वाले शहीद के गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की कई बार आवाज भी उठ चुकी है बावजूद कोई सुनवाई नहीं है सकी।
कोसी घाटी स्थित सिमलखा गांव के भराड़ीधार तोक (बेतालघाट ब्लॉक) निवासी भारतीय सेना का जांबाज लास नायक चंदन सिंह भंडारी 19 अगस्त 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हो गया था। महज 28 वर्ष की उम्र में देश के लिए बलिदान देने वाले वीर सपूत की यादों के सहारे अब इसका परिवार जिंदा है। शहीद की मां पार्वती देवी ने अपने बलिदानी सपूत की याद में जीआइसी के नामकरण की इच्छा जताई थी। मगर जिंदा रहते उसकी मुराद पूरी न हो सकी पर देर से ही सही पर जीआइसी सिमलखा अब शहीद चंदन सिंह भंडारी इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाने लगा है। पूर्ववर्ती सरकार में शिक्षा मंत्री रहे अरविंद पांडे ने विद्यालय का नाम शहीद के नाम पर रखने का शासनादेश जारी किया था। देश की खातिर बलिदान देने वाले वीर सपूत की पत्नी को सरकार ने पेट्रोल पंप भी आंवटित किया है पर शहीद का गांव आज भी सड़क सुविधा का इंतजार कर रहा है। परिवार भी मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। शहीद के परिवार में किसी एक को नौकरी देने की मांग उठने के बाद दावे तो खूब हुए पर धरातल पर कुछ नहीं हो सका है। शहीद के छोटे भाई पूरन सिंह भंडारी के अनुसार देश की रक्षा को जान गंवाने वाले भाई पर गर्व है। वो आज भी यादों में जिंदा है। रुंधे गले से पूरन ने सरकार की अनदेखी पर निराशा भी जताई।

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