◾आम आदमी की थाली से दूर होने लगी है सब्जी
◾बारिश न होने से कोसी घाटी के किसानों की उपज हुई प्रभावित
◾स्थानीय सब्जियां बाजार में न आने से बढ़ने लगे दाम
◾फलों की कीमतों में भी आया उछाल, मिठास हुई फिकी
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
मानसून की दस्तक के बावजूद कोसी घाटी में बारिश न होने से सब्जियों की उपज प्रभावित होने लगी है। स्थानीय सब्जियों के बाजार में न पहुंचने से बाहरी मंडियों से पहुंच रही सब्जियों के दाम भी आसमान पहुंच रहे हैं। बेहतर पैदावार न होने से किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कोसी घाटी में सब्जियों की बंपर पैदावार होती है। यहां की सब्जियां अपने स्वाद के लिए विशेष पहचान रखती है। फूलगोभी, शिमला मिर्च, बीन, टमाटर आदि सब्जियां स्थानीय बाजार के साथ ही बड़ी मंडियों तक भी भेजी जाती है पर इस वर्ष मानसून की दस्तक के बावजूद समय पर बारिश न होने से स्थानीय सब्जियों की पैदावार प्रभावित होने लगी है। कोसी घाटी के गांवों की सब्जियां बाजार न पहुंचने से बड़ी मंडियों से सब्जियां बाजार पहुंच रही है जिस कारण सब्जियों के भाव आसमान पहुंच गए हैं। स्थानीय सब्जी व्यवसाई दीपक सिंह बिष्ट के अनुसार टमाटर 80, शिमला मिर्च 60, गोभी 60, बीन 50, लौकी 50, बैंगन 40, खीरा 60, अरबी 70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। सब्जियों के दाम बढ़ने से आम आदमी की थाली से सब्जियां दूर होने लगी है वहीं बारिश न होने से सब्जी की पैदावार प्रभावित होने से स्थानीय किसान भी मायूस हो चुके हैं। किसानों ने प्रभावित उपज का मुआवजा दिए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।
फलों की कीमतों में भी आया उछाल
सब्जियों के साथ ही फलों की कीमतों में उछाल आ गया है। गरमपानी खैरना बाजार क्षेत्र में फलों की कीमतें भी बढ़ गई है। सेब 280, आम 50, रिची 80 अनार150, पपीता 60 रुपये प्रतिकिलो पहुंच चुका है जबकि केला 50 रुपये दर्जन जा पहुंचा है। कुमाऊनी त्यौहार हरेला पर्व पर दामों में और उछाल आने की संभावना है।
