◾ मझेडा़ वन पंचायत के बड़े हिस्से को आग ने किया खाक
◾ वन पंचायत के पूर्व सरपंच ने विभागीय कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
◾ सुबह से शाम तक धू-धू कर जली रही वन संपदा
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))

जंगलो को आग से बचाने के तमाम दावे तो किए जाते है पर धरातल में दावे खोखले साबित हो रहे हैं। मझेडा़ वन पंचायत में लगी आग वन विभाग के दावो को झुलसा रही है। सुबह से शाम तक वन पंचायत का जंगल आग से धधकता रहा बावजूद जिम्मेदारों ने आग को बुझाने की जहमत नहीं उठाई। पूर्व पंचायत सरपंच ने विभागीय कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है।
बारिश से काफी हद तक जंगलों को आग से राहत मिली है पर मंगलवार को एकाएक रातीघाट – बेतालघाट मोटर मार्ग से सटा मझेडा़ वन पंचायत का जंगल वनाग्नि की चपेट में आ गया। देखते देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटों ने वन पंचायत के बड़े हिस्से को चपेट में ले लिया बावजूद वन विभाग की नींद नहीं टूटी। सुबह से शाम तक जंगल लगातार धधकता रहा। कई हेक्टेयर वन संपदा खाक होने का अंदेशा है। पूर्व में पर्यावरण संरक्षण को लगाए गए पौधों को भी नुकसान पहुंचा है। जंगल से लगातार धुआं उठने के बावजूद वन विभाग के कर्मचारी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। वन पंचायत के पूर्व सरपंच दीपेन्द्र त्रिपाठी ने मामले पर गहरी नाराजगी जताई है। आरोप लगाया कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद धरातल पर कुछ नहीं हो रहा। सरपंच ने जंगलों को आग से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की पुरजोर मांग की है।

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