🔳 जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि को सुरक्षित रखने के बताए तौर तरीके
🔳 उपकरणों व सामग्रियों को खेतों में सही विधि से स्थापित करने का दिया गया प्रशिक्षण
🔳 कम लागत में बेहतर उत्पादन पर दिया गया जोर
🔳 खैरना रानीखेत स्टेट हाईवे से सटे गांव में हुआ कार्यक्रम

[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]

खैरना रानीखेत स्टेट हाईवे से सटे खुशालकोट गांव में किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीक की विस्तार से जानकारी दी गई। चिया संस्था ने यूएनडीपी तथा बीएमजीएफ वित्तपोषित परियोजना जलवायु अनुकूलन हेतु डेटा विज्ञान का स्थानीयकरण विषय पर किसानों को आय बढ़ाने के तौर तरीके बताए। कार्यक्रम में पचास से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया।

खुशालकोट गांव में हुए कार्यक्रम में उद्यान विभाग के विशेषज्ञ रमेश चंद्र सती ने कृषकों को मल्चिंग, वर्मी कम्पोस्ट, मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि को सुरक्षित रखने वाली विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों तथा कृषि के नवीन व उन्नत तरीकों से परिचित कराया। मल्चिंग शीट, वर्मीबेड, कीट प्रपंच (इन्सेक्ट ट्रैप) तथा कीट आकर्षक यंत्रों के महत्व, उपयोग व लाभों की जानकारी साझा की। किसानों को उपकरणों व सामग्रियों को खेतों में सही विधि से स्थापित करने तथा उपयोग करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं खेत में जाकर मल्चिंग शीट बिछाने, वर्मीबेड स्थापित करने तथा कीट प्रपंचों व कीट आकर्षक यंत्रों को उचित स्थान पर लगाने का अभ्यास किया। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीकों की जानकारी देना है जिनके माध्यम से वे कम लागत में बेहतर उत्पादन कर सकें। परियोजना सहायक मनीषा पंत ने बताया कि चिया संस्था से परियोजना चार ग्राम पंचायतों में संचालित की जा रही है। परियोजना के तहत किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन व आजीविका विकास से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान ग्राम प्रधान देवेंद्र सिंह, उप प्रधान किरण आर्या, प्रवीण कुमार, मोहन सिंह, पान सिंह, गोपाल सिंह, खड़क सिंह तथा विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं व किसान मौजूद रहे‌।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *