🔳 किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए देखने को हुए मजबूर
🔳 हाड़तोड़ मेहनत कर खेत किए तैयार पर अब तक नहीं हुई गेहूं की बुआई
🔳 बुआई प्रभावित होने से किसानों के माथे पर गहराई चिंता की लकीरें
🔳 बेतालघाट, रामगढ़ व ताड़ीखेत ब्लॉक के तमाम गांवों में हालात जस के तस
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]

तीन महीने से भी अधिक समय से बारिश न होने से तमाम गांवों में सूखे से हालात पैदा हो गए हैं। हाड़तोड़ मेहनत के बाद किसानों ने खेत तो तैयार कर लिए हैं पर बारिश न होने से अब तक गेहूं की अब तक बुआई नहीं हो सकी है। वर्षा आधारित खेती वाले गांवो में खेतों के बंजर पड़े होने से किसान मायूस हो चुके हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में खेतीबाड़ी पर संकट गहराने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई है। सूखे से हालात पैदा होने से तमाम गांवों में अब तक गेहूं की बुआई तक नहीं हो सकी है जबकि बारिश के इंतजार में किसान खेतों को तैयार कर बैठे हैं। बकायदा खाद खेतों तक पहुंचाई जा चुकी है पर इंद्रदेव मेहरबान नहीं हो रहे। अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे से सटे ताड़ीखेत ब्लॉक के सुनियाकोट, ओखिना, सिरोली, बेड़गांव समेत तमाम गांवों में सूखे से हालात बने हुए हैं। प्रगतिशील किसान राजेंद्र सिंह परिहार, चंदन सिंह, नारायण सिंह, कैलाश सिंह, पूरन सिंह आदि के अनुसार जंगली जानवरों व बंदरों के आंतक से पहले ही खेती सिमट गई है अब बारिश न होने से गेहूं की बुआई भी प्रभावित हो चुकी है ऐसे में भविष्य में अनाज की पैदावार पर भी संकट गहरा गया है। इंद्रदेव के रुठने से अब तक गेहूं की बुआई तक नहीं की जा सकी है‌। बेतालघाट व रामगढ़ ब्लॉक के कई गांवों में भी हालात जस के तस बने हुए हैं। गांवों के किसान बारिश के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाए देखने को मजबूर हो चुके हैं। देव सिंह, गोपाल सिंह, हीरा सिंह, इंद्र सिंह, हरीश मेहरा, हरीश परिहार आदि ने किसानों को राहत दिलाने के लिए मुआवजा दिए जाने की मांग उठाई है।

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