◾अस्पताल के आवासीय परिसर में झाड़ियां बनी पहरेदार
◾जिम्मदारो की अनदेखी से बदहाल हालत में पहुंचा परिसर
◾ करोड़ों रुपये की लागत से बने भवन पर बड़ी बड़ी झाड़ियों का कब्जा
◾सरकारी भवन की उपेक्षा कर रही अधिकारियों की कार्यप्रणाली की हकीकत बंया
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
पहाड़ के बाशिंदे मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं अब हालात और ज्यादा बद से बद्तर हो चुके हैं। पहाड़ में सेवा दे रहे कर्मचारी तक सुविधाओं के अभाव में तमाम परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं बावजूद अफसरान व हुक्मरान अनदेखी पर आमादा है। स्वास्थ्य केंद्र ऊंचाकोट का आवासीय परिसर अफसरों की अनदेखी का जीता जागता उदाहरण बन चुका है।
रातीघाट – बेतालघाट मोटर मार्ग पर ऊंचाकोट व आसपास के गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को वर्षों पूर्व स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया। करोड़ों रुपये के सरकारी बजट से कर्मचारियों की सुविधा को आवासीय भवन भी तैयार किए गए। उम्मीद थी की ग्रामीणों के साथ अस्पताल में सेवारत कर्माचारियों को भी लाभ मिल सकेगा। अब हालात एकदम उलट है। अस्पताल परिसर में बने आवासीय भवन अफसरों की अनदेखी के शिकार हो चुके हैं। आवासीय परिसर के चारों और बड़ी बड़ी झाड़ियों ने कब्जा जमा लिया है। बद से बद्तर हालत में पहुंच चुके आवासीय भवनों की अनदेखी से लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। आवासीय भवनो के बदहाल होने से अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी भी किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं बावजूद सुध नहीं ली जा रही। क्षेत्रिय जन विकास संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष मनीष तिवारी, दयाल सिंह दरमाल, बिशन जंतवाल, विरेंद्र सिंह बिष्ट, फिरोज अहमद, विक्रम सिंह आदि ने करोड़ों रुपये के बजट से तैयार आवासीय परिसर की बदाहाली के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। आरोप लगाया है की जब सरकारी भवन ही देखरेख के लिए तरस रहे हैं तो ऐसे में विकास कार्यों की बात करना तक बेमानी है। समिति पदाधिकारियों ने ऊंचाकोट स्वास्थ्य केंद्र के आवासीय भवनों की हालत में सुधार किए जाने की मांग उठाई है।
