🔳 बारह बरस इंतजार से पथरा गई ग्रामीणों की आंखें
🔳 पूर्व सीएम हरीश रावत ने की थी नए भवन निर्माण व समुचित चिकित्सकों की तैनाती की घोषणा
🔳 आज भी किराए के भवन में संचालित किया जा रहा अस्पताल
🔳 पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने लगाया उपेक्षा का आरोप
[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]

अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर काकड़ीघाट क्षेत्र में दस बैड का सुविधायुक्त अस्पताल निर्माण की सरकारी घोषणा के बावजूद आज तक अस्पताल के सुध न लिए जाने पर पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी जताई है। आरोप लगाए की क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। दो टूक कहा की जल्द अस्पताल निर्माण की कार्रवाई शुरु नहीं की गई तो आंदोलन की रुपरेखा तैयार की जाएगी।
काकड़ीघाट क्षेत्र में किराए के भवन पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के नौगांव, सूरी, गडस्यारी, बेडगांव, जाला, समेत तमाम गांवों के सैकड़ों ग्रामीण निर्भर है बावजूद अस्पताल किराए के भवन में संचालित है। यही नहीं सैकड़ों की आबादी के बावजूद ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए दूरदराज रुख करना मजबूरी है। ग्रामीणों की मांग पर करीब बारह वर्ष पूर्व तत्कालीन हरीश रावत सरकार के समय मुख्यमंत्री ने काकड़ीघाट में दस बैड का अस्पताल संचालन तथा भवन को स्वीकृति भी दी पर लंबा समय बीतने के बावजूद आज तक अस्पताल भवन के निर्माण को कवायद शुरु नहीं हो सकी है। अब भी अस्पताल किराए के भवन में ही संचालित है साथ ही अस्पताल में सुविधाओं के साथ ही समुचित चिकित्सकों का भी टोटा बना हुआ है। पंचायत प्रतिनिधि व गांवों के लोग अस्पताल भवन निर्माण व समुचित चिकित्सकों की तैनाती व बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठा चुके हैं बावजूद सुध नहीं ली जा रही। जिला पंचायत सदस्य निशा कनवाल ने क्षेत्र की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगा गहरी नाराजगी जताई है। जिंप सदस्य के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दूरदराज से लोग काकड़ीघाट स्थित अस्पताल पहुंचते हैं पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध न होने से दूरदराज रुख करना मजबूरी बन चुकी है। पूर्व प्रधान देवेंद्र सिंह, गोपाल सिंह कनवाल, गोविंद सिंह मेहरा, मोहन सिंह जलाल, कुनाल रावत, हिम्मत सिंह, धन सिंह, दीवान सिंह, हरीश बेलवाल आदि ने सरकारी घोषणा के अनुसार जल्द ही अस्पताल भवन के निर्माण के साथ ही समुचित चिकित्सकों व सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। दो टूक चेतावनी दी है की यदि अनदेखी की गई तो फिर ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन की रुपरेखा तैयार की जाएगी।