🔳 अल्ट्रासाउंड सेवा न होने से गर्भवती महिलाएं भी परेशान
🔳 प्रसव पीड़ा में पचास से सत्तर किमी की दूरी नापनी मजबूरी
🔳 क्षेत्रवासी कई बार नेताओं व अफसरों से लगा चुके गुहार बावजूद नहीं हो रही सुनवाई
[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]

दर्जनों गांवों के मध्य में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेतालघाट में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने तथा अल्ट्रासाउंड सेवा उपलब्ध न होने से ग्रामीण सैकड़ों किलोमीटर दूर रुख करने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधि व ग्रामीण लंबे समय से मांग भी उठाते रहे बावजूद सुनवाई नहीं हो पा रही। अतिमहत्वपूर्ण मानी जाने वाली स्त्री रोग तथा बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने का खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोग विभिन्न शिविरों के अलावा कई बड़े जिम्मेदार नेताओं से तक अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती तथा अल्ट्रासाउंड सेवा उपलब्ध कराने की गुहार लगा चुके हैं बावजूद अनदेखी की जा रही है जिसका खामियाजा गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

नेत्र सहायक व एक स्टाफ नर्स का पद रिक्त

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमानुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों समेत नौ चिकित्सकों तथा समुचित पैरामेडिकल स्टाफ व लैब टैक्नीशियन की तैनाती का प्रावधान है पर सीएचसी बेतालघाट में वर्तमान में छह चिकित्सक तैनात हैं पर विशेषज्ञ एक भी नहीं तीन चिकित्सा मेडिकल डिग्री के लिए बाहर है। पैरामेडिकल स्टाफ में भी एक पद स्टाफ नर्स का रिक्त पड़ा है जबकि नेत्र सहायक की कुर्सी भी खाली पड़ी है। अस्पताल में पैथोलॉजी की सुविधा के साथ ही आपातकालीन सेवा का वाहन उपलब्ध है।

प्रसव पीड़ा में अल्ट्रासाउंड को पचास किमी से अधिक की दूरी नापना मजबूरी

ब्लॉक मुख्यालय बेतालघाट स्थित सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती व होने से ग्रामीणों को हल्द्वानी, रामनगर व काशीपुर आदि क्षेत्रों को रुख करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड सेवा न मिलने से गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा में बेतालघाट से पचास से सौ किमी की दूरी नापने को मजबूर हो जाती है। दूर दराज रुख करने में वाहनों के किराए आदि में एक से दो हजार रुपये खर्च होता है।

रोजाना पचास से सत्तर मरीज पहुंचते हैं अस्पताल

तमाम गांवों के मध्य में स्थित होने से रोजाना तमाम गांवों से मरीज उपचार को सीएचसी पहुंचते हैं। अस्पताल में रोजाना पचास से सत्तर ओपीडी दर्ज होती है जबकि प्रतिमाह सात आठ डिलीवरी भी अस्पताल में होती है। चिकित्सा प्रभारी डा. सतीश पंत के अनुसार सप्ताह में दो या तीन लोगों को ही रेफर किया जाता है। प्रयास करते हैं की सभी को अस्पताल में ही समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके।

पिछले तीन वर्षों में साढ़े सात लाख रुपये की मिली सरकारी मदद

वर्ष 1997 के आसपास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से उच्चीकृत होकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बने बेतालघाट अस्पताल को पिछले तीन वर्षों में सरकारी मदद के नाम साढ़े सात लाख रुपये का बजट उपलब्ध हुआ। बजट को आपातकालीन दवाईयां, इंजेक्शन तथा बिजली पानी समेत अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में किया गया है।

पचास लाख से अस्तित्व में आएगा पब्लिक हेल्थ यूनिट

सीएचसी परिसर में पब्लिक हेल्थ यूनिट निर्माण के लिए पचास लाख रुपये के बजट को स्वीकृति मिल चुकी है। यूनिट के निर्माण की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग को सौंपी गई है। स्वीकृति बजट से रोग निगरानी कक्ष, जांच, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का क्रियान्वयन, गुणवत्ता व रोगी सुरक्षा, योजना व निगरानी, डाटा सत्यापन व निगरानी तथा सुपर विज़न कक्ष का निर्माण किया जाएगा। खास बात यह है की स्वास्थ्य कर्मियों के लिए प्रशिक्षण केन्द्र भी स्थापित किया जाएगा। यूनिट स्थापित होने से निश्चित ही सैकड़ों गांवों के हजारों लोग लाभान्वित होंगे।

बोले लोग

अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक के न होने से तमाम परेशानियां सामने आती है। हजारों की आबादी अस्पताल पर निर्भर है। स्वास्थ्य विभाग को स्त्री व बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती होनी चाहिए।
गणेश चंद्र, ग्राम प्रधान घोड़ियां हल्सो

लगातार मांग उठाई जा रही है बावजूद सुध नहीं ली जा रही। अल्ट्रासाउंड सेवा अतिआवश्यक है पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग क्षेत्र की उपेक्षा पर आमादा है। विभाग की अनदेखी का खामियाजा क्षेत्रवासियों को उठाना पड़ रहा है।
तारा भंडारी, पूर्व सचिव छात्र संघ

अल्ट्रासाउंड के लिए प्रसव पीड़ा में बेतालघाट से रामनगर, काशीपुर व हल्द्वानी की यात्रा दुखदाई है। स्वास्थ्य विभाग ने सचल वाहन के जरिए सप्ताह में एक दो दिन अल्ट्रासाउंड के लिए शिविर लगाना चाहिए ताकी लोगों को लाभ मिल सके।
जानकी लोहिया, नौघर

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