◾आपदा प्रभावितों को जमीन आवंटित किए जाने का मामला पकड़ा तूल
◾मझेडा़ क्षेत्र के वासिदों ने सूरीफार्म क्षेत्र में भूमि आवंटन पर उठाई आपत्ति
◾विभिन्न राजनीतिक, गैर-राजनीतिक व व्यापारिक संगठनों ने आपत्ति को ठहराया गलत
◾ सरकारी भूमि पर आवंटन पर सवाल खड़े न करने की दे डाली नसीहत
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
आपदा प्रभावितों को सूरीफार्म क्षेत्र में भूमि आवंटन पर मझेडा़ गांव के वासिदो के सवाल खड़े करने तथा आंवटन निरस्त करने को लेकर एसडीएम कोश्या कुटोली को ज्ञापन सौंपे जाने का मामला तूल पकड़ गया है। ग्राम पंचायत छड़ा खैरना के वासिंदो ने आपदा प्रभावित लोगों को भूमि आवंटन पर सवाल खड़े करने को गलत करार दिया है। आरोप लगाया है की प्रभावित परिवारों की मदद के उलट आंवटन न किए जाने का मुद्दा उठाया जा रहा है। दो टूक चेताया है कि यदि प्रभावित परिवारों के हितों से खिलवाड़ करने की कोशिश की गई तो आंदोलन की रुपरेखा तैयार की जाएगी।
दरअसल बीते तीन वर्ष पूर्व मुसलाधार बारिश के बाद उफान में आई शिप्रा नदी ने गरमपानी – खैरना क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। तीन आवासीय मकानों को जमींदोज करने के साथ ही कई भवनों को भारी नुकसान पहुंचाया। प्रशासन ने आपदा प्रभावितों के लिए भूमि आवंटन व भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा। अब सूरीफार्म क्षेत्र में भूमि आवंटन व भवन निर्माण को धनराशि स्वीकृत होने पर आपदा प्रभावितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी ही थी कि मझेडा़ क्षेत्र के वाशिंदो ने बीते शुक्रवार को उपजिलाधिकारी कोश्या कुटोली को ज्ञापन सौंप सूरीफार्म क्षेत्र में भूमि आवंटन पर सवाल खड़े कर आंवटन निरस्त करने की मांग उठा दी। आपदा प्रभावित को भूमि आवंटन पर आपत्ति जताने पर विभिन्न राजनीतिक, गैर-राजनीतिक, प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल तथा क्षेत्रीय जन विकास संघर्ष समिति से जुड़े पदाधिकारी व सदस्यों ने निंदनीय करार दिया है। आरोप लगाए है कि प्रभावित परिवारों की मदद के उल्ट हितों से खिलवाड़ की बात करना गलत है। तर्क दिया की प्रभावित को सरकारी भूमि आवंटित की गई है ना कि किसी व्यक्ति की निजी भूमि। ऐसे में विरोध न्यायसंगत नहीं है। आपत्ति को तत्काल निरस्त करने की पुरजोर मांग की है।
