= आए दिन मवेशियों को ढेर कर रहा गुलदार
= आय का एकमात्र साधन पशुपालन भी चौपट होने के कगार पर पहुंचा
= ग्रामीणों ने गांव में पिंजरा लगा गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की उठाई मांग

(((कुबेर जीना/अंकित सुयाल/महेंद्र कनवाल/भीम बिष्ट की रिपोर्ट)))

रामगढ़ ब्लॉक के बिरखन गांव में गुलदार की घुसपैठ तेज हो गई है। आए दिन गुलदार मवेशियों को मार डाल रहा है जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। खेती-बाड़ी चौपट होने के बाद अब पशुपालन पर भी संकट मंडराने लगा है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव में पिंजरा लगा गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की पुरजोर मांग उठाई है।
बिरखन गांव में गुलदार दहशत का पर्याय बन चुका है। आबादी तक पहुंच मवेशियों को मार डालने से ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। आए दिन गुलदार मवेशियों का शिकार कर रहा है। गांवो में खेती-बाड़ी चौपट हो चुकी है अब ग्रामीण पशुपालन कर रोजी रोटी की व्यवस्था में जुटे हुए हैं तो गुलदार मवेशियों को मार डाल रहा है जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बैंकों से ऋण लेकर भी लोगों ने पशुपालन शुरू किया पर गुलदार की घुसपैठ से पशुपालक परेशान है। बुधवार को गुलदार ने सरपंच कुबेर सिंह के गोवंशीय पशु को ही मार डाला। स्थानीय मदन सिंह, गोपाल सिंह, इंदर सिंह, हरेंद्र सिंह आदि लोगों ने पशुपालन विभाग से गांव में पिंजरा लगाने तथा पशुपालकों को मुआवजा दिए जाने की पुरजोर मांग उठाई है।