🔳 हाईटेक डिजिटल लैब, प्रयोगशाला तथा लाइब्रेरी का लाभ उठा रहे गांवों के नौनिहाल
🔳 खंड शिक्षा अधिकारी ने सही मंशा के सहारे बदल डाली विद्यालय की तस्वीर
🔳 डेढ़ वर्ष पूर्व शुरु हुआ था प्रयास अब धरातल पर उतरा
🔳 प्रवासी व अप्रवासी भारतीयों ने भी मदद को बढ़ाए हाथ
[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]

जहां चाह वहां राह। जी हां नारायण स्वामी इंटर कॉलेज रामगढ़ के बदले स्वरुप पर यह कहावत एकदम फिट बैठती है। एक ओर सरकारी स्कूलों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है पर नारायण स्वामी इंटर कॉलेज की स्थिति देखकर कतई महसूस नहीं होता की ये एक सरकारी विद्यालय है। रुपांतरण कार्यक्रम की सूत्रधार रही खंड शिक्षा अधिकारी गीतिका जोशी ने सही मंशा को लेकर उठाए कदम के सहारे विद्यालय की स्थिति बदलकर रख दी है। गांवों से शिक्षा ग्रहण करने पहुंच रहे नौनिहाल इस सरकारी स्कूल में किसी हाईटेक प्राइवेट विद्यालय जैसी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
रामगढ़ में स्थित नारायण स्वामी इंटर काॅलेज भी पूर्व में अन्य स्कूलों की तरह बदहाली का दंश झेल रहा था पर विद्यालय को संवारने व नौनिहालों को बेहतर व हाई-टेक शिक्षा उपलब्ध कराने को लिए गए संकल्प ने विद्यालय की स्थिति को बदलकर रख दिया है। वर्तमान में 125 के आसपास छात्र संख्या वाले विद्यालय में आसपास के तमाम गांवों के नौनिहाल हाईटेक डिजिटल लैब, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी में बेहतर शिक्षा ग्रहण कर रहे। स्किल डेवलपमेंट को भी बच्चे हाईटेक क्लासरुम में बैठकर बेहतर भविष्य का सपना देख रहे हैं। खास बात यह है कि डिजिटल व रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला तथा कंप्यूटर व संगीत के लिए प्रशिक्षित शिक्षक की तैनाती की गई है जिसके वेतन का जिम्मा प्रवासी व अप्रवासी भारतीय उठा रहे हैं। नारायण स्वामी इंटर कॉलेज के स्वरुप को बदलने में मुख्य भूमिका निभाने वाली खंड शिक्षा अधिकारी गितिका जोशी की पंचायत प्रतिनिधि व अभिभावक खूब सराहना कर रहे हैं।

मदद को बढ़ते चले हाथ

विद्यालय में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्रयास वर्ष 2023 में शुरु हुए। लाइब्रेरी के लिए दस लाख रुपये की धनराशि जिला योजना के तहत मिली। अमेरिका निवासी डा. पंकज काव व अरुंधती बेंगलुरु निवासी संजीव पाण्डेय ने मदद को हाथ बढ़ाए। बाबा नीम करौली ट्रस्ट के सहयोग से आपदा से क्षतिग्रस्त लाईब्रेरी को दुरुस्त किया गया।डिजिटल लैब के निर्माण में गौरव जोशी, अनिल मंगला व अंजू मंगला ने सहयोग किया। जिसमें 11 लाख रुपये की राशि खर्च हुई। प्रतिमाह 25 हजार रुपये डिजिटल लैब में प्रशिक्षकों का वेतन भी दिया जाता है। विद्यालय की छत का पुनर्निर्माण, भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला, बाउंड्री फैंसिंग, सोलर पैनल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य मुंबई निवासी रमेश दासवानी के सहयोग से करवाया जा सका जिसमें लगभग 40 लाख रुपये की धनराशि खर्च हुई। केमिस्ट्री व कंपोसाइड लैब मधुबन आश्रम के सहयोग से संचालित हुई जिसमें विक्रांत अब्राल ने 15 लाख रुपये की धनराशि खर्च की। प्रशिक्षक की व्यवस्था भी मधुबन आश्रम ने की है। कंप्यूटर शिक्षक व संगीत शिक्षक की व्यवस्था काशीपुर निवासी प्रतीक तथा विद्यालय की पहली मंजिल में रंग रोगन रुद्रपुर निवासी सचिन मंगला के सहयोग से किया गया।

सीडीओ व आरटीओ ने पहल का दिया साथ

विद्यालय को बेहतर स्वरुप में लाने को मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडे, आरटीओ विमल पांडे तथा विद्यालय के शिक्षक राजेंद्र अधिकारी, रश्मि पांडे, मनोज कुमार ने भी खंड शिक्षा अधिकारी गीतिका को हर कदम पर मदद की और विद्यालय में शिक्षा लेने वाले नौनिहाल बेहतर सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।

बीईओ गीतिका जोशी बोली –

शिक्षा में समानता लाकर अमीर व गरीब के बच्चों के शिक्षा के अंतर को समाप्त करना लक्ष्य है। अगर संवैधानिक समानता के अधिकार व शिक्षा के अधिकार को वास्तव में धरातल पर उतारना है, तो समाज के अन्य लोगों को भी सरकारी विद्यालयों को संवारने के लिए आगे आना होगा। अन्य स्कूलों में भी बदलाव लाने को प्रयास किया जा रहा है।