◾ हाड़तोड़ मेहनत के बाद एक बार फिर फल से लदे पेड़
◾फल उत्पादक पट्टी में रसीला रेड जून आडू हुआ तैयार
◾दिल्ली, मुंबई, लखनऊ जैसे महानगरों में है यहां के आडू की खास पहचान
◾मौसम ने साथ दिया तो बेहतर मुनाफे की उम्मीद
((( टीम तीखी नजर की रिपोर्ट)))
आपदा ने बागबानों के बगीचों को तहस नहस कर डाला बावजूद मजबूत हौसले से किसानों ने बगीचों को आबाद किया। अब एक बार फिर विख्यात फल उत्पादन पट्टी का रसीला आडू धाक जमाने को तैयार हैं। रेड जून प्रजाति का आडू दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में भी खास पहचान रखता है। धारी, उल्गौर, रुपसिंह धूरा आदि गांवों से आडू महानगरों को भेजा जाने लगा है। हालांकि उम्मीद के मुताबिक उत्पादन कम है। किसानों के अनुसार यदि मौसम ने साथ दिया तो बेहतर मुनाफे की उम्मीद है।
अपने स्वाद के लिए खास पहचान रखने वाला रेड जून आडू की उपज लगभग तैयार हो चुकी है। दो वर्ष पूर्व मूसलाधार बारिश के बाद उफान में आए बरसाती गधेरो ने बगीचों को खासा नुकसान पहुंचाया। खेत मलबे व बडे़ बडे़ पत्थरों से पट गए। तब उपज को भी काफि नुकसान पहुंचा। नुकसान से किसानों को मायूस जरुर किया पर धरतीपुत्रों ने हार नहीं मानी दिन रात मेहनत के बाद खेतों में भरा मलबा हटाया दोबारा खेत तैयार किए। हाड़तोड़ मेहनत के बाद अब किसान पेड़ों में लदकद फल व बेहतर मुनाफे की उम्मीद से किसान खुश हैं। बेतालघाट ब्लॉक के धारी, उल्गौर, रुपसिंह धूरा, हरतोला गांव में लगभग तैयार हो चुके आडू को हल्द्वानी, रुद्रपुर, बरेली के साथ ही लखनऊ, दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में भेजे जाने की तैयारियां भी शुरु हो चुकी है। फल उत्पादक किसान पंकज भट्ट के अनुसार मौसम ने साथ दिया तो बेहतर मुनाफे की उम्मीद है।
स्वास्थ्य के लिए भी संजीवनी है आडू
आडू स्वाद में बेहद स्वादिष्ट होने के साथ ही स्वास्थ्य वर्धक भी है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में आडू को खास माना है वहीं पेट संबंधित तमाम बीमारियां को ठीक करने में इसका सेवन रामबाण माना जाता है। कोरोनाकाल में तो कई चिकित्सकों ने संक्रमण से ग्रसित मरीजों को आडू का सेवन करने की राय दी।
