🔳 किसानों के पौधों की खरीद को न पहुंचने से बढ़ने लगी चिंता
🔳 बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष साठ फीसदी कारोबार प्रभावित
🔳 मौसम चक्र बदलने से फल उत्पादन पर भी संकट गहराने का अंदेशा
[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]
मौसम की बेरुखी से फल उत्पादक किसानों के साथ नर्सरी स्वामी भी मायूस हो गए हैं। साढ़े तीन महीने से अधिक समय से बारिश न होने से आड़ू, पुलम, खुमानी व नाशपाती के पौधो का अब तक उठान नहीं हो सका है जबकि नर्सरी स्वामी बागबानों का इंतजार करते करते निराश हो चुके हैं। यशोदा पौधालय के स्वामी पितांबर भट्ट के अनुसार पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष लगभग साठ फिसदी व्यवसाय प्रभावित हो चुका है।
इंद्रदेव की बेरुखी से भविष्य में फल उत्पादन पर भी असर पड़ने का खतरा मंडरा गया है। आड़ू, पुलम, खुमानी व नाशपाती के पौधों के लिए विख्यात बेतालघाट ब्लॉक के उल्गौर, धारी व आसपास के गांवों के नर्सरी स्वामी पौधों का उठान न होने से चिंतित हैं। नर्सरी से बेतालघाट ब्लॉक के चमोली, कोटद्वार, उत्तरकाशी, चंपावत के साथ ही बेतालघाट ब्लॉक के कफुल्टा, बारगल, सिल्टोना आदि क्षेत्रों को फलों के पौधों की आपूर्ति की जाती है पर इस वर्ष बारिश न होने से किसान पौधों की खरीद को नर्सरियों तक नहीं पहुंच पाए हैं। फलों के पौधों का उठान न होने से नर्सरी स्वामियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गांव में स्थित यशोदा, अंबा, मनोज, कविता नर्सरियों के स्वामियों की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई है। नर्सरी स्वामियों के अनुसार साठ फिसदी व्यवसाय प्रभावित हो चुका है। बारिश न होने से किसान पौधों की खरीद से पीछे हट रहे हैं। यही हालात रहे तो इस वर्ष फल कारोबार प्रभावित होने का भी अंदेशा बढ़ गया है।
