= उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी की रौद्र में बह गए 23 उपभोक्ताओं के सिलेंडर
= कई बार उठा चुके आवाज नहीं हो रही सुनवाई
= गैस गोदाम प्रबंधक बोले – उच्चाधिकारियों को भेज दी गई सूचना
(((कुबेर जीना/अंकित सुयाल/विजय रौतेला/महेंद्र कनवाल की रिपोर्ट)))
सरकार आपदा प्रभावितों के जख्मों पर मरहम लगाने के लाख दावे करे पर धरातल में दावे खोखले साबित हो रहे हैं। जहां गांवो में किसानों को आज तक कृर्षि भूमि कटान का मुआवजा नहीं मिल सका है वहीं गरमपानी खैरना बाजार में शिप्रा नदी की भेंट चढ़े रसोई गैस सिलेंडर तक आपदा प्रभावितों को नहीं मिल सके है। विभागीय लापरवाही पर लोगों ने रोष जताया है। आपदा को छह माह बीतने के बावजूद आपदा प्रभावितों को रसोई गैस सिलेंडर मुहैया न कराए जाने से विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
अक्टूबर में हुई मूसलाधार बारिश ने पर्वतीय क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया। खैरना क्षेत्र में कई आवासीय भवन जमींदोज हो गए। गांवों में कृषि भूमि ध्वस्त हो गई। कई लोगों के आवासीय भवन भी दरक गए। गांवो में किसानों को हुए नुकसान का आज तक मुआवजा नहीं मिल सका है। जबकि शासन प्रशासन आपदा प्रभावितों की सुध लेने के बड़े-बड़े दावे करता है। खैरना क्षेत्र में भवन स्वामियों के मकानों के साथ ही रसोई गैस सिलेंडर भी शिप्रा नदी की भेंट चढ़ गए पर आपदा को छह माह बीतने के बावजूद आज तक लोगों को सिलेंडर मुहैया नहीं कराए जा सके है। आदत प्रभावित लोगों से रसोई गैस सिलेंडर मांग कर बमुश्किल काम चला रहे हैं। गैस गोदाम बेतालघाट के प्रबंधक पंकज ज्याला के अनुसार पूर्ति विभाग ने करीब 23 सिलेंडरों के बहने की सूचना दी थी जिसे उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। उच्चाधिकारियों से अग्रिम आदेश मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
