🔳 जान हथेली पर रख स्कूल को आवाजाही बनी नियति
🔳 स्कूल के रास्ते में लगी रैलिंग छह महीनों से है क्षतिग्रस्त
🔳 बच्चों के खाई की ओर गिरने बढ़ता ही जा रहा खतरा
🔳 कभी भी बड़ी अनहोनी सामने आने का अंदेशा
[[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]

सरस्वती शिशु मंदिर खैरना को आवाजाही करने वाले नौनिहाल जिम्मेदारों की अनदेखी का खामियाजा भुगत रहे हैं। पैदल रास्ते में छह महीने से भी अधिक समय से क्षतिग्रस्त रैलिंग बड़ी अनहोनी की ओर इशारा कर रही है। मजबूरी में स्कूली बच्चे व गांवों के लोग जान हथेली पर रख आवाजाही कर रहे हैं।
खैरना चौराहे से आसपास के गांवों व सरस्वती शिशु मंदिर को जोड़ने वाले रास्ते पर दुर्घटना का खतरा बरकरार है पर खतरा टालने को कोई प्रयास नहीं किए जा रहे। पैदल रास्ते से रोजाना डोबा, मझेडा समेत आसपास के गांवों के लोग व शिशु मंदिर के सैकड़ों नौनिहाल रोजाना आवाजाही करते हैं। छह महीने से भी अधिक समय से रास्ते में लगी लोहे की रैलिंग ध्वस्त पड़ी है जिससे बच्चों के खाई की ओर गिरने का खतरा बना हुआ है पर जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं। लोगों को दुख दर्द का साथी बताने वाले जनप्रतिनिधि व समाजसेवियों को भी बच्चों की जिंदगी पर मंडरा रहा खतरा दिखाई नहीं दे रहा। लगातार अनदेखी किए जाने से बच्चों को विद्यालय लेकर पहुंच रहे अभिभावक भी परेशान हैं। खतरा टालने को ठोस उपाय न होने से अभिभावकों में चिंता के साथ नाराजगी भी बढ़ने लगी है। स्कूली बच्चों की जिंदगी से हो रहे खिलवाड़ पर क्षेत्रवासियों ने भी रोष जताया है। प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नेगी, दर्शन पांडे, योगेश पांडे, मनीष तिवारी, फिरोज अहमद आदि ने स्कूली रास्ते से खतरा टालने को ठोस उपाय किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। अंदेशा जताया है की यदि समय रहते सुध नहीं ली गई तो कभी भी बड़ी घटना सामने आ सकती है।

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