🔳 खस्ताहाल भवन खोल रहा अफसरों की कार्यप्रणाली की पोल
🔳 पंचायत चुनाव के शोर में भी नहीं सुनाई दे रही बदहाली की आवाज
🔳 ग्रामीण विकास के दावों की पोल खोल रही पंचायत भवन की स्थिति
🔳 कई विधानसभा, लोकसभा व पंचायत चुनाव बीते पर हालत आज भी जस के तस
[[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]]]

पंचायत के त्यौहार के बीच बेतालघाट ब्लॉक के उल्गौर गांव का पंचायत भवन चीख चीख कर बदहाली बयां कर रहा है। पर न तो सिस्टम को पंचायत भवन की बदहाली दिख रही है न जनप्रतिनिधियों को ही खंडहर में बदल चुका पंचायत भवन दिख रहा। विधानसभा, लोकसभा चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव के समय भी परिसर में उगी बड़ी बड़ी झाड़ियां तंत्र की बेरुखी की हालत बयां कर रही है। जिम्मेदारों की अनदेखी से गांव के लोगों में गहरी नाराजगी भी व्याप्त है।
गांवों में सरकारी भवनों के निर्माण को बजट तो खूब खपाया जाता है पर निर्माण हो जाने के बाद भवन की देखरेख की सुध तक नहीं ली जाती। वर्तमान में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरे चरम पर है। दावेदार बड़े बड़े दावे कर रहे हैं पर उल्गौर गांव में बना पंचायत भवन दावों की हकीकत की पोल खोल रहा है। पंचायत भवन को विकास की पहली सीढ़ी कहा जाता है। पंचायत भवन में बैठकर ही विभागीय अधिकारी व ग्रामीण विकास योजनाओं का खाका तैयार करते हैं पर बेतालघाट ब्लॉक के उल्गौर गांव में हालात एकदम उलट है। बीस वर्ष पूर्व लाखों रुपये के सरकारी बजट से तैयार पंचायत भवन वर्तमान में खंडहर में तब्दील है। जिम्मेदारों की अनदेखी पंचायत भवन पर भारी पड़ चुकी है। मुख्य द्वार पर जंक लगा बोर्ड और अंदर ध्वस्त हो चुके कमरे सिस्टम की कारगुजारी की पोल खोल रहा है। पंचायत भवन की हालत से जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर तरस आने लगता है। स्थानीय पंकज भट्ट के अनुसार खंडर बन चुके पंचायत भवन में एक भी बैठक नहीं हुई है। समीपवर्ती प्राथमिक विद्यालय परिसर में ही गांव की खुली बैठक होती है। आरोप लगाया की सरकारी भवन की यह हालत अफसरों की गैरजिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का ही परिणाम है। निवर्तमान ग्राम प्रधान सूरज आर्या के अनुसार नए भवन के लिए प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भी भेजा गया पर आज तक बजट ही उपलब्ध नहीं हो सका है। बहरहाल लाखों रुपये के बजट से तैयार पंचायत भवन की स्थिति अफसरों की कार्यप्रणाली की हकीकत बयां कर रही है।

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