🔳 रामगढ़ ब्लॉक के विद्यालयों में शुरु हुआ मशरुम उत्पादन का कार्य
🔳 पहले चरण में 33 भोजन माताओं को दिया गया है विशेष प्रशिक्षण
🔳 शिक्षा विभाग ने धरातल में उतारी प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना
🔳 नौनिहालों के पोषण स्तर में वृद्धि करना है योजना का मकसद
🔳 प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर व आयरन से भरपूर है मशरुम
[[[[[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]]]]]
सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत नौनिहालों को मध्याह्न भोजन में अब पौष्टिकता से भरपूर मशरुम परोसा जाएगा। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत रामगढ़ ब्लॉक में शिक्षा विभाग ने पहले चरण में मशरुम उत्पादन कर योजना को धरातल में उतारने की तैयारी भी कर ली है। बकायदा 33 भोजन माताओं को मशरुम उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। बीईओ गितिका जोशी के अनुसार सभी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन में मशरुम उपलब्ध कराने को गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।
रामगढ़ ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत नौनिहालों अब मिड डे मील योजना में मशरूम का स्वाद चखेंगे। स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाना वाला मशरुम पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर युक्त होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर मशरुम को मध्याह्न भोजन में शामिल कर लिया गया है। सरकार की प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत अब विद्यालय परिसर में ही भोजनमाता मशरुम उत्पादन करेंगी तथा मध्याह्न भोजन में बच्चों को इसकी सब्जी परोसी जाएगी। रामगढ़ ब्लॉक के विद्यालयों में बकायदा इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। करीब 33 भोजन माताएं मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण भी ले चुकी है। दूसरे चरण में भी कई अन्य भोजन माताओं का प्रशिक्षण प्रस्तावित है। योजना का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत नौनिहालों के पोषण स्तर में वृद्धि करना है। शिक्षा विभाग ने विद्यालय परिसर में मशरूम उत्पादन के लिए बकायदा विशेष व्यवस्था भी बनाई है। कुछ विद्यालयों में मशरुम की उपज तैयार भी हो चुकी है। मशरुम उत्पादन से जहां नौनिहालों को पौष्टिकता से भरपूर सामग्री मिल सकेगी वहीं भोजन माताएं स्वरोजगार से भी जुड़ सकेंगी। रामगढ़ ब्लॉक में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत शुरु किए गए मशरुम उत्पादन कार्यक्रम से अभिभावकों ने भी खुशी व्यक्त कर इसे नौनिहालों के हित में शानदार योजना करार दिया है। खंड शिक्षा अधिकारी गितिका जोशी के अनुसार पहले चरण में कुल विद्यालयों में उत्पादन किया जा चुका है। 33 भोजन माताओं को प्रशिक्षण भी मिल चुका है। अब दूसरे चरण में भोजन माताओं को प्रशिक्षित कर उत्पादन करवाया जाएगा। पौष्टिक मशरुम से निश्चित रुप से बच्चों को स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।
