🔳 दिवंगत लोकगायक को उत्तराखंड सदन में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
🔳 दीवान कनवाल के निधन को करार दिया प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति
🔳 महाकौथिग व कुमाऊनी भाषा, साहित्य तथा सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में हुआ कार्यक्रम
[[[[[[[ टीम तीखी नजर की रिपोर्ट ]]]]]]]]

सुप्रसिद्ध लोकगायक दीवान सिंह कनवाल के निधन पर उत्तराखंड सदन (दिल्ली) में हुए कार्यक्रम में लोकगायक को श्रद्धांजलि दी गई। महाकौथिग तथा कुमाऊनी भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने लोकगायक के निधन को उत्तराखंड प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया।
शनिवार को दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा, साहित्य व सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों ने दिवंगत लोकगायक को भावभीनी श्रद्धांजलि दे उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि दीवान सिंह कनवाल ने अपने मधुर स्वरों व लोकगीतों के माध्यम से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को नई पहचान दी। उनके गीतों में पहाड़ की मिट्टी की सुगंध, लोकजीवन की संवेदना व संस्कृति का गहरा प्रभाव झलकता था। कुमाऊनी भाषा , साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र हालसी ने कहा कि उत्तराखंड ने अपना एक महान लोकगायक खो दिया । उनका लोकगायन हमेशा याद रहेगा । उन्होंने उनके साथ बिताए पलों को भी सांझा किया। वरिष्ठ संगीतकार राजेंद्र चौहान ने भी उनसे जुड़ी सभी स्मृतियां साझा की। इस दौरान लोक गायिका कल्पना चौहान, वरिष्ठ साहित्यकार पूरन चंद्र कांडपाल, रमेश घिंडियाल, बहादुर सिंह बिष्ट, वरिष्ठ रंगकर्मी केएन पांडे, भोपाल सिंह रावत, जगदीश तिवारी , वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी, दीप सिलोड़ी, हरीश असवाल, मनोज आर्या, सुबोध थपलियाल, भुवन रावत, रेणु उनियाल, शीला पंत, निर्मल नेगी, महेश गंधर्व आदि मौजूद रहे।